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सात उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का समूह है G-7, भारत के बढ़ते महत्व के क्या हैं मायने?

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(Special story) विश्व की सात उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का ऐसा समूह जो, दुनिया में आने वाली महत्वपूर्ण चुनौतियों  और तमाम तरह के संघर्षों से निपटने के लिए एक साथ बैठकर चर्चा करते हैं, उसे G-7 शिखर सम्मेलन कहा जाता है। G-7 में शामिल  सदस्य देश वर्तमान में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 45 फीसदी और दुनिया की 10 फीसदी से ज्यादा आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस  शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज इटली रवाना हो गए हैं। हालांकि भारत G7 का सदस्य नहीं है लेकिन फिर भी भारत अबतक 10 बार G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले चुका है। आखिर क्या वजह है कि भारत ग्लोबल साउथ की एक मजबूत आवाज बन चुका है। आइए विस्तार से जानते हैं-

जी-7 में भारत का बढ़ता महत्व 

आज भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।  इसकी अर्थव्यवस्था जी-7 के तीन सदस्य देशों- फ्रांस, इटली और कनाडा से भी बड़ी है। शायद यही वजह हो सकती है कि बीते कुछ  सालों से भारत को नियमित रूप से जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सेशन  में आमंत्रित किया  जाता रहा  है। भारत ने हाल ही में अपनी जी-20 अध्यक्षता संपन्न की है । भारत ने पिछले जी-7 शिखर सम्मेलन में की गई अपनी भागीदारी में हमेशा ग्लोबल साउथ के मुद्दों को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया है। पीएम मोदी ने ने 2023 में हिरोशिमा में अपने चौथे जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के दौरान तीन पूर्ण (प्लेनरी) सत्रों में भारत का पक्ष रखा था। आमंत्रित भागीदार देशों के साथ मिलकर 'हिरोशिमा एक्शन प्लान फॉर रिजिल्यंट ग्लोबल फूड सिक्योरिटी' विषय पर एक संयुक्त दस्तावेज (जॉइंट आउटकम डॉक्यूमेंट) अपनाया गया। 50वें जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम की भागीदारी के साथ ही इसमें समिट के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी शामिल हैं। इस शिखर सम्मेलन में भारत की यह 11वीं और पीएम मोदी की लगातार पांचवीं भागीदारी होगी। पीएम मोदी आउटरीच सेशन में शामिल होंगे। सम्मेलन से इतर पीएम मोदी की जी7 देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की भी संभावना है। विदेश सचिव विनय मोहन क्वान्ना के अनुसार ' जी 7 यह शिखर सम्मेलन 14 जून को आयोजित किया जाएगा,इस दौरान वे इटली की इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ बैठक करेंगे। 

इन उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का समूह है G-7

इस जी-7 यह शिखर सम्मेलन यूक्रेन में युद्ध और गाजा संघर्ष का मुद्दा छाये रहने की संभावना है। जी 7 विश्व की सात उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें ये 7 देश शामिल हैं-

  • अमेरिका
  • ब्रिटेन
  • फ्रांस
  • इटली
  • जर्मनी
  • कनाडा
  • जापान 

G-7 के इस बार के क्या हैं मुद्दे?

50वें जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में दो सत्र होंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन और सप्लाई चेन जैसी कुछ नई महत्वपूर्ण चुनौतियों के अलावा यूक्रेन और मध्य पूर्व में युद्ध का मुद्दा छाए रहने की भी पूरी संभावना है। इटली के अनुसार, यूक्रेन पर रूस के आक्रामक युद्ध ने उसके सिद्धांतों को कमजोर कर दिया है और बढ़ती अस्थिरता को जन्म दिया है  जिससे दुनियाभर में कई संकट सामने आ रहे हैं।  जी7 मध्य-पूर्व में संघर्ष को वैश्विक एजेंडे पर इसके परिणामों के साथ समान महत्व देगा।  G7 नेता अन्य विषयों के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर एक सत्र के लिए परम पावन पोप फ्रांसिस के साथ शामिल होंगे। जनवरी 2024 को इटली सातवीं बार जी-7 का अध्यक्ष बना है। 

क्या थे G-7 के शुरूआती मुद्दे-

आर्थिक मुद्दों पर अपने शुरुआती फोकस से जी-7 धीरे-धीरे शांति और सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी, विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन समेत प्रमुख वैश्विक चुनौतियों पर समाधान और सर्वमान्य मत खोजने के लिए विचार का एक मंच बन गया है।  2003 से गैर-सदस्य देशों (एशिया और अफ्रीका के पारंपरिक रूप से विकासशील देश) को 'आउटरीच' सेशन में आमंत्रित किया गया है। जी-7 ने इसके साथ सरकार और तंत्र से अलग गैर-सरकारी हितधारकों के साथ भी बातचीत को बढ़ावा दिया जिससे व्यापार, नागरिक समाज, श्रम, विज्ञान और शिक्षा, थिंक-टैंक, महिलाओं के अधिकारों और युवाओं से संबंधित मुद्दों पर कई सहभागिता समूहों का निर्माण हुआ। वे जी-7 के अध्यक्ष देश को अपनी अनुशंसा प्रदान करते हैं।

जब जी-7 बन गया था G-8

जी-7 सदस्य देश वर्तमान में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 45% और दुनिया की 10% से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। अपनी परंपरा के अनुरूप अध्यक्षता करने वाले मेजबान देश द्वारा कई देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों को शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया जाता है  इससे पहले 1997 और 2013 के बीच रूस को शामिल किए जाने से इसका जी8 के तौर पर विस्तार हुआ था।  हालांकि, क्रीमिया पर कब्जे के बाद 2014 में रूस की सदस्यता सस्पेंड कर दी गई थी।  

भारत के अलावा ये देश भी होंगे शामिल- 

जी-7 शिखर सम्मेलन की परंपरा के अनुरूप आउटरीच सेशन में इटली ने कई राज्यों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भी आमंत्रित किया है भारत के अलावा अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और भारत-प्रशांत क्षेत्र के 11 विकासशील देशों के नेताओं को न्योता भेजा गया है। इनमें इटली ने इंडिया के अलावा ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, अल्जीरिया, अर्जेंटीना, मिस्र, केन्या, मॉरिटानिया, सऊदी अरब, ट्यूनीशिया और संयुक्त राष्ट्र का का नाम शामिल है।  

इतने बार भारत जी-7 में ले चुका है हिस्सा-

  • 2003 में फ्रांस
  • 2005 में यूके
  • 2006 में रूस
  • 2007 में जर्मनी
  • 2008 में जापान
  • 2009 में इटली
  • 2019 में फ्रांस
  • 2021 में यूके
  • 2022 में जर्मनी
  • 2023 में जापान 

इटली में होगा ये  शिखर सम्मेलन

50 वां जी-7 शिखर सम्मेलन इस बार इटली के अपुलिया क्षेत्र में लग्जरी रिजॉर्ट बोरगो एग्नाजिया में 13 से 15 जून तक आयोजित होगा। 

By Ankit Verma 

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