केंद्र की मोदी सरकार "आव्रजन (Immigration) और विदेशी विधेयक, 2025" लाने की योजना बना रही है, जो पासपोर्ट, वीजा और विदेशी नागरिकों से जुड़े नियमों को नया रूप देगा। इस विधेयक के जरिए अस्पतालों, चिकित्सा संस्थानों और विदेशी छात्रों को प्रवेश देने वाले विश्वविद्यालयों की भूमिका को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाएगा, जिससे आव्रजन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाया जा सके।
बजट सत्र में पेश हो सकता है विधेयक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसे संसद में पेश कर सकते हैं। यह नया कानून पुराने और जटिल कानूनों को खत्म कर सरल और प्रभावी व्यवस्था लाएगा। यदि विधेयक पारित होता है, तो निम्नलिखित कानून प्रभावी रूप से समाप्त हो जाएंगे—
✅ पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920
✅ विदेशी पंजीकरण अधिनियम, 1939
✅ विदेशी अधिनियम, 1946
✅ आव्रजन (वाहक दायित्व) अधिनियम, 2000
क्या होगा नए विधेयक में?
विधेयक के उद्देश्यों के अनुसार, यह आव्रजन अधिकारियों के कार्यों, पासपोर्ट और वीजा से जुड़े नियमों को व्यवस्थित करेगा। साथ ही, इसमें विदेशियों के पंजीकरण, विश्वविद्यालयों और चिकित्सा संस्थानों की जिम्मेदारियों को भी शामिल किया जाएगा।
🔹 विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान— विदेशी छात्रों को प्रवेश देने के नियमों को स्पष्ट किया जाएगा।
🔹 अस्पताल और चिकित्सा संस्थान— विदेशियों का इलाज करने वाले संस्थानों की जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।
🔹 पंजीकरण और निगरानी— विदेशियों के आगमन, रुकने और गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी होगी।
सरकार को मिलेंगे नए अधिकार
यह विधेयक केंद्र सरकार को विदेशी नागरिकों के निष्कासन, माफी और आदेश जारी करने का स्पष्ट अधिकार देगा। वर्तमान में ये मामले विदेशी अधिनियम, 1946 और आव्रजन (वाहक दायित्व) अधिनियम, 2000 के तहत प्रबंधित किए जा रहे हैं, जो युद्धकाल में बनाए गए कानून हैं।
पुराने कानूनों की जगह एक सरल व्यवस्था
सरकार का उद्देश्य पुराने, जटिल और दोहराव वाले कानूनों को खत्म करके एक व्यवस्थित और प्रभावी कानून लाना है। यह आधुनिक जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाएगा, जिससे आव्रजन प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाया जा सके। नया विधेयक विदेशी छात्रों, चिकित्सा पर्यटन और कानूनी प्रवास को सरल बनाएगा, जिससे भारत में आव्रजन प्रक्रिया सुगम और प्रभावी हो सकेगी।