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बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति गंभीर, अलग देश की मांग हुई तेज!

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बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से हिंदुओं की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1971 में बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी लगभग 20% थी, जो 2024 तक घटकर मात्र 7-8% रह गई है। इस गिरावट के पीछे धार्मिक अत्याचार, जबरन धर्म परिवर्तन, मंदिरों पर हमले, संपत्तियों पर अवैध कब्जा और सांप्रदायिक हिंसा जैसी घटनाएँ जिम्मेदार हैं।

हजारों हिंदू परिवार कर चुके हैं पलायन

इन घटनाओं के कारण हजारों हिंदू परिवार भारत पलायन कर चुके हैं या बांग्लादेश में असुरक्षित माहौल में जीवन यापन कर रहे हैं। इस बीच, बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों के लिए एक अलग देश की मांग उठने लगी है।

नया देश: रंगपुर और चटगांव डिवीजन पर नजर

अल्पसंख्यक समुदायों के लिए प्रस्तावित नए देश में रंगपुर और चटगांव डिवीजन को शामिल करने की चर्चा हो रही है। रंगपुर डिवीजन भारत के पश्चिम बंगाल और असम से सटा हुआ है, जबकि चटगांव डिवीजन मिजोरम और त्रिपुरा की सीमाओं के करीब स्थित है। यदि इन क्षेत्रों को अलग कर दिया जाए, तो यह हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों के लिए एक सुरक्षित स्थान बन सकता है।

भारत के लिए यह केवल मानवाधिकार नहीं, बल्कि सुरक्षा का मुद्दा

बांग्लादेश का यह मामला भारत के लिए केवल मानवाधिकार का विषय नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा है। हाल ही में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के चीन दौरे के दौरान दिए गए एक बयान ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। उन्होंने भारत के "सेवन सिस्टर्स" राज्यों की भौगोलिक कमजोरी की ओर इशारा किया, जिसे चीन आसानी से घेर सकता है।

चिकन नेक कॉरिडोर: भारत की सुरक्षा पर खतरा

भारत का 'चिकन नेक' कॉरिडोर केवल 22 किलोमीटर चौड़ा है, जो उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है। यदि इस संकीर्ण मार्ग पर कोई हमला होता है या बांग्लादेश इसमें हस्तक्षेप करता है, तो पूरा नॉर्थ-ईस्ट भारत से कट सकता है। लेकिन यदि रंगपुर भारत में शामिल हो जाता है, तो यह कॉरिडोर 150 किलोमीटर तक चौड़ा हो सकता है, जिससे यह क्षेत्र अधिक सुरक्षित हो जाएगा और भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी।

क्या भविष्य में हकीकत बन सकता है यह विचार?

1971 में जब बांग्लादेश बना था, तब भी यह एक असंभव सपना ही था। लेकिन अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे, तो भविष्य में यह नया विचार भी साकार हो सकता है। फिलहाल यह मुद्दा एक चर्चा का विषय है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले वर्षों में हालात किस ओर मुड़ते हैं। क्या बांग्लादेश का पुनर्विभाजन संभव है? क्या हिंदुओं को एक नया देश मिल सकता है? और क्या इससे भारत की सुरक्षा मजबूत होगी? यह सवाल अब वैश्विक स्तर पर बहस का विषय बनता जा रहा है।

 

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