विदेशी कॉफी में मिलाई जा रही चिकोरी न सिर्फ स्वाद बढ़ा रही है, बल्कि अलीगढ़ और एटा के किसानों को भी समृद्धि की ओर ले जा रही है। इन क्षेत्रों की चिकोरी ने 12 देशों में अपनी पहचान बना ली है, जहां इसे कॉफी की खुशबू और स्वाद को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस क्षेत्र से 184 करोड़ रुपये का बड़ा निर्यात हुआ है।
चिकोरी के निर्यात में अलीगढ़ और एटा का महत्वपूर्ण योगदान
वित्तीय वर्ष 2023-24 में एटा जिले से कुल 122 करोड़ रुपये की चिकोरी का निर्यात हुआ, जिसमें 15,197 मीट्रिक टन चिकोरी विदेशों में भेजी गई। वहीं, अलीगढ़ जिले से पहली बार 62 करोड़ रुपये की चिकोरी का निर्यात हुआ। चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में अप्रैल से अगस्त के बीच अब तक 1514 करोड़ रुपये का निर्यात हो चुका है, जिससे इस कारोबार का भविष्य और भी उज्जवल नजर आ रहा है।
चिकोरी: प्रोटीन और विटामिन से भरपूर
चिकोरी एक पौधे की जड़ होती है, जिसका वानस्पतिक नाम चिकोरियम एंटीबस है। यह जड़ प्रोटीन और विटामिन से भरपूर होती है, जिसे कॉफी में मिलाकर उसका स्वाद और खुशबू बढ़ाई जाती है। यह जड़ वजन कम करने, किडनी की पथरी के उपचार में और विषाक्तता को दूर करने में सहायक मानी जाती है। इसमें जिंक, मैग्नीशियम, कैल्शियम, लौह, फोलिक पोटेशियम और विटामिन ए, बी-6, सी, ई, और के की भरपूर मात्रा होती है।
चिकोरी के बिजनेस की बढ़ती संभावनाएं
अलीगढ़ के छर्रा, अतरौली और इगलास में चिकोरी की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है। यहां लगभग 3500 बीघा जमीन पर इसकी खेती की जा रही है। अतरौली और इगलास में चिकोरी के 15 प्लांट स्थापित हैं। एटा में चिकोरी का निर्यात 2007 में शुरू हुआ था, और वर्तमान में यहां 85 चिकोरी प्लांट काम कर रहे हैं। दस बड़ी कंपनियां चिकोरी का पाउडर बनाकर इसका निर्यात कर रही हैं।
चिकोरी के निर्यात में निरंतर वृद्धि-
एटा से चिकोरी के निर्यात की शुरुआत मुरली कृष्णा चिकोरी फर्म द्वारा 2007 में हुई थी। इसके बाद 2015 में मुरली कृष्णा फूड और 2016 में जूपिटर फूड प्राइवेट लिमिटेड भी इस क्षेत्र में शामिल हो गई। अब यह क्षेत्र चिकोरी के उत्पादन और निर्यात का बड़ा केंद्र बन चुका है।
चिकोरी का स्थानीय कारोबार भी तेजी से बढ़ रहा-
चिकोरी का कारोबार सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की नामी कॉफी निर्माता कंपनियां भी स्थानीय स्तर पर इसकी खरीद कर रही हैं। चिकोरी का तैयार पाउडर 100 रुपये प्रति किलो, कच्चा फल 37 रुपये और रोस्टेड फल 54 रुपये किलो के भाव से निर्यात किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर भी चिकोरी की 16 करोड़ रुपये की बिक्री हो रही है, जिससे कुल कारोबार 200 करोड़ रुपये के पार पहुंच रहा है।
चिकोरी के बीज की उपलब्धता-
चिकोरी की खेती के लिए बीज विदेशों से मंगवाए जाते हैं, और 1 अक्टूबर से ये बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इसकी फसल मार्च तक तैयार होती है, जो निर्यात के लिए तैयार होती है। अलीगढ़ और एटा के किसानों के लिए चिकोरी की खेती एक महत्वपूर्ण आर्थिक साधन बन चुकी है।
12 देशों में हो रहा चिकोरी का निर्यात-
अलीगढ़ और एटा की चिकोरी अब यूक्रेन, ताइवान, तुर्किए, वियतनाम, इंडोनेशिया, बेलारूस, अल्जीरिया, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, और मलेशिया सहित 12 देशों में निर्यात की जा रही है। इन देशों में इसकी बड़ी मांग है, जिससे यहां के किसानों को भी लाभ हो रहा है।
मुख्य बिंदु-
- चिकोरी का कुल कारोबार: 200 करोड़ रुपये
- निर्यात: 184 करोड़ रुपये
- स्थानीय बिक्री: 16 करोड़ रुपये
- चिकोरी खरीदने वाली स्थानीय कंपनियां: 04
- अलीगढ़ में चिकोरी प्लांट्स: 15
- अलीगढ़ में खेती का क्षेत्र: 3500 बीघा
- एटा में चिकोरी प्लांट्स: 85
- एटा में खेती का क्षेत्र: 200 हेक्टेयर
किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार-
चिकोरी का कारोबार अलीगढ़ और एटा के किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। निर्यातक गौरव वार्ष्णेय का कहना है, "चिकोरी का निर्यात शुरू हो गया है और हम इसे और आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। विदेशों में इसकी अच्छी मांग है।"