बड़ी खबरें

भर्तृहरि महताब बने प्रोटेम स्पीकर, राष्ट्रपति ने दिलाई शपथ 21 घंटे पहले नीट विवाद में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, दोषियों पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग 21 घंटे पहले लखनऊ में UPSRTC मुख्यालय के बाहर मृतक आश्रितों का नौकरी की मांग पर धरना, 'नियुक्ति दो या जहर दे दो' का लिखा स्लोगन 21 घंटे पहले लखनऊ में 33 विभूतियों समेत 66 मेधावी सम्मानित, क्षत्रिय लोक सेवक परिवार ने हल्दीघाटी मनाया विजयोत्सव 21 घंटे पहले वर्ल्ड चैंपियन इंग्लैंड ने टी-20 वर्ल्ड कप में सबसे पहले सेमीफाइनल में बनाई जगह, अमेरिका को एकतरफा मुकाबले में 10 विकेट से हराया 21 घंटे पहले संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट (SGPGI) लखनऊ में 419 वैकेंसी, 25 जून 2024 है लास्ट डेट, 40 वर्ष तक के उम्मीदवारों को मिलेगा मौका 21 घंटे पहले हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) ने मेडिकल ऑफिसर के 805 पदों पर निकाली भर्ती, 12 जुलाई 2024 है आवेदन करने की लास्ट डेट 21 घंटे पहले CBSE ने रीजनल डायरेक्टर सहित अन्य पदों पर निकाली भर्ती, एज लिमिट 56 वर्ष, सैलरी 65 हजार से ज्यादा 21 घंटे पहले मोदी ने सांसद पद की ली शपथ, 18वीं लोकसभा का पहला संसद सत्र शुरू 20 घंटे पहले सुप्रीम कोर्ट का केजरीवाल को तत्काल राहत देने से इनकार, 26 जून को होगी अगली सुनवाई 18 घंटे पहले

उत्तर प्रदेश की बहुउद्देशीय परियोजनाएं- भाग 1

उत्तर प्रदेश पर विशेष फोकस करके चलने वाली लेखों की इस श्रृंखला में उत्तर प्रदेश की कुछ ऐसी बहुउद्देशीय परियोजनाओं के बारे में चर्चा की गयी है जिन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास को एक नई गति दी। यहाँ सबसे पहले यह यह जान लेना जरूरी है के बहुउद्देशीय परियोजनाएं आखिर होती क्या हैं। “बहुउद्देशीय परियोजनाएं दरअसल उन परियोजनाओं को कहते हैं जिनमे एक परियोजना के कई सारे लाभ और उद्देश्य होते हैं”। जैसे-किसी नदी पर बांध बनाकर वहाँ से नहर, पेयजल, सिंचाई, मत्स्यपालन, जलविद्युत उत्पादन के साथ-साथ और भी तमाम तरह के काम सिर्फ एक ही परियोजना से पूरे किए जा सकते हैं । ये परियोजनाएं बहुत बड़ी होती है जिनमे लाखो हेक्टेयर भूमि और अरबों रुपए की लागत और भारी समय लगता है लेकिन एक बार पूरी हो जाने पर ये उस क्षेत्र की किस्मत भी बदलने की क्षमता रखती हैं ।

भारत की पहली बहुउद्देशीय नदी परियोजना
आजाद भारत की पहली बहुउद्देशीय नदी परियोजना 7 जुलाई 1948 को दामोदर नदी परियोजना के रूप में शुरू की गई थी जिसने पूर्वी भारत के औद्योगीकरण (Industrialization) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

उत्तर प्रदेश की प्रमुख बहुउद्देशीय रिहंद नदी परियोजना
इस परिजोजना का निर्माण 1962 में पूरा हुआ। यह परियोजना सोनभद्र जिले के पिपरी नमक स्थान में निर्मित की गई है और इसे सोन की सहायक नदी रिहंद पर बनाया गया है । इस परियोजना में रिहंद नदी पर बनाया गया रिहंद बांध, रिहंद जल विद्युत गृह, ओबरा बांध, ओबरा जल विद्युत गृह आदि परियोजना के प्रमुख घटक हैं। रिहंद बांध के कारण बना गोविंद बल्लभ पंत सागर जलाशय आयतन के आधार पर भारत का सबसे बड़ा जलाशय है। रिहंद बांध द्वारा जल विद्युत के अलावा सिंचाई की सुविधाएं मत्स्यपालन पेयजल आपूर्ति आदि की जाती है। रिहद बांध उत्तरप्रदेश की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना है और यह बांध एक ग्रेविटी बाद यानी गुरुत्व बांध है। इसी के साथ गोविंद सागर में एकत्रित जल को मोड़ करके सोन नहर में मिलाया जाता है जो की पूर्वी उत्तर प्रदेश में सिंचाई का बड़ा स्रोत है । रिहंद बांध से 300 मेगा वॉट बिजली उत्पादन के साथ उसी के आगे बने ओबरा बांध से लगभग 90 मेगा वॉट बिजली का उत्पादन किया जाता है । रिहंद परियोजना से उत्पादित बिजली से डाला,चुर्क आदि में स्थित सीमेंट प्लांट को चलाया जाता है। इसके साथ ही नैनी में स्थित टायर ट्यूब फैक्ट्री, प्रयागराज के पास फूलपुर की उर्वरक फैक्ट्री तथा मिर्जापुर की एल्यूमीनियम फैक्ट्री को भी इसी परियोजना से बिजली दी जाती है। इस परियोजना से उत्पादित बिजली को पूर्वी उत्तर प्रदेश में घरेलू उपभोग के लिए भी ट्रांसमिशन लाइन की सहयता से भेजा जाता है।

 

 

अन्य ख़बरें

संबंधित खबरें