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उत्तर प्रदेश की बहुउद्देशीय परियोजनाएं: भाग 2

उत्तर प्रदेश पर विशेष फोकस करके चलने वाली लेखों की इस श्रृंखला में उत्तर प्रदेश की कुछ ऐसी बहुउद्देशीय परियोजनाओं के बारे में चर्चा की गयी है जिन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास को एक नई गति दी। यहाँ सबसे पहले यह यह जान लेना जरूरी है के बहुउद्देशीय परियोजनाएं आखिर होती क्या हैं। “बहुउद्देशीय परियोजनाएं दरअसल उन परियोजनाओं को कहते हैं जिनमे एक परियोजना के कई सारे लाभ और उद्देश्य होते हैं”। जैसे-किसी नदी पर बांध बनाकर वहाँ से नहर, पेयजल, सिंचाई, मत्स्यपालन, जलविद्युत उत्पादन के साथ-साथ और भी तमाम तरह के काम सिर्फ एक ही परियोजना से पूरे किए जा सकते हैं । ये परियोजनाएं बहुत बड़ी होती है जिनमे लाखो हेक्टेयर भूमि और अरबों रुपए की लागत और भारी समय लगता है लेकिन एक बार पूरी हो जाने पर ये उस क्षेत्र की किस्मत भी बदलने की क्षमता रखती हैं ।

उत्तर प्रदेश की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजना 
राजघाट बांध परियोजना 
राजघाट बांध परियोजना बेतवा नदी पर ललितपुर के समीप निर्मित की गई है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सम्मिलित परियोजना है। इस परियोजना का उद्देश्य सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र का कायाकल्प करना था।

माताटीला बांध

बेतवा नदी पर ही आगे चलके एक और बांध का निर्माण किया गया है जिसका नाम है- माताटीला बांध। इस बांध का निर्माण 1958 में झांसी के पास बेतवा नदी में किया गया था। इस परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई के साथ 30 मेगावाट जलविद्युत का उत्पादन भी किया जाता है। इस परियोजना के द्वारा गुरसराय और मंदर नहरों द्वारा हमीरपुर और जालौन जिलों में सिंचाई भी की जाती है। इसके अलावा बेतवा नदी पर दो और छोटे बांध ढकवा और परीक्षा बांध भी बनाए गए हैं।


शारदा सागर परियोजना
इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की एक और परियोजना का नाम आता है और वो है शारदा सागर परियोजना। शारदा सागर बांध भारत नेपाल सीमा पर पीलीभीत जिले में शारदा नदी पर स्थित है। शारदा नदी जिसे काली या महाकाली भी कहते हैं वो हिमालय की कालापानी नामक जगह से निकलती है। इस बांध का प्रयोग भी जलापूर्ति सिंचाई जैसे कार्यों में जल प्रदान करने के लिए किया जाता है। इसी शारदा सागर बांध के पास पीलीभीत टाइगर रिजर्व भी स्थित है और इसी टाइगर रिजर्व में  चूका बीच स्थित है जो पर्यटन की दृष्टि से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी है। 

 

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