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उत्तर प्रदेश में पर्यटन: मुद्दे एवं संभावनाएं

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उत्तर प्रदेश का पर्यटन भारत भर में सुविख्यात है। उत्तर प्रदेश में पर्यटन एक नया उभरता हुआ उद्योग है। उत्तर प्रदेश में पर्यटन के विभिन्न दायरे (यथा-दृश्य/प्राकृतिक पर्यटन, ऐतिहासिक एवं विरासत पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटक, धार्मिक पर्यटक, ग्रामीण ही पर्यटक, शैक्षिक पर्यटन) की अपार संभावनाएं हैं। पर्यटन, उत्तर प्रदेश में व्यापक रोजगार आय और ग्रामीण विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उत्तर प्रदेश में पर्यटन

उत्तर प्रदेश भारतीय एवं विदेशी पर्यटकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस प्रदेश में कई ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल हैं। उत्तर प्रदेश की आबादी भारत के सभी राज्यों में सबसे अधिक है। भौगोलिक रूप से भी उत्तर प्रदेश में विविधता देखने को मिलती है- उत्तर की ओर हिमालय पर्वत हैं और दक्षिण में सिन्धु-गंगा के मैदान हैं। शिवालिक की पहाडियों में शाकम्भरी शक्तिपीठ तीर्थ है। भारत का सबसे लोकप्रिय ऐतिहासिक पर्यटन स्थल ताज महल यहां के आगरा शहर में स्थित है। वाराणसी, जो कि हिन्दुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है जो इसी प्रदेश में है। साथ ही साथ भगवान श्रीराम की जन्म स्थली अयोध्या पावन नगरी जो की सरयू नदी के पावन स्थल पर विराजमान है। इसी प्रदेश में माता सती के नौ रूपों में एक माँ पाटन देवी का मंदिर भी तुलसीपुर में विराजमान है। भगवान गौतम बुद्ध का मंदिर भी अत्यंत ही मनमोहक और खूबसूरत है जो कि उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जनपद में स्थित है जहां हर वर्ष लाखों बौद्ध भिक्षु दर्शन को आते हैं। प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। प्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन विकास के लिये आधारभूत संरचनाओं में वृद्धि की गयी है। इससे पर्यटन वृद्धि के राजस्व में वृद्धि होने के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन भी हो रहा है। 

उत्तर प्रदेश में पर्यटन से संबंधित मुद्दे

अवसंरचना और कनेक्टिविटी संबंधित मुद्दा: बुनियादी ढाँचे की कमी और अपर्याप्त कनेक्टिविटी के कारण पर्यटकों को कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रचार और जागरूकता की कमी: उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में  पर्यटन क्षेत्र के प्रचार में काफी वृद्धि देखी गई है, किंतु अभी भी ऑनलाइन मंचों पर यूपी के पर्यटक स्थलों को लेकर प्रचार और जागरूकता की कमी स्पष्ट दिखाई देती है।
प्रबंधन की कमी: पर्यटक सूचना केंद्रों को सही ढंग से प्रबंधित नहीं किया जाता है जिससे घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिये आवश्यक जानकारी प्राप्त करना काफी मुश्किल हो जाता है।
आवश्यक कौशल की कमी: पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के लिये पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित व्यक्तियों की कम संख्या पर्यटन उद्योग के लिये एक बड़ी चुनौती है, जिसके कारण यहां आने वाले पर्यटकों को विश्व स्तरीय अनुभव प्रदान करना मुश्किल हो जाता है।
पर्यटक सुरक्षा: यूपी में आने वाले विदेशी पर्यटकों को प्रायः लूट और चोरी आदि का सामना करना पड़ता है जिसके कारण उनके मन में कानून-व्यवस्था को लेकर एक नकारात्मक छवि उत्पन्न होती है।

उत्तर प्रदेश में पर्यटन में संभावनाएं

उत्तर प्रदेश में पर्यटन की अपार सम्भावनाएं है। प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। प्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन विकास के लिये आधारभूत संरचनाओं में वृद्धि की गयी है। प्रदेश में कृषि और ग्राम्य पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। गांवों में उन्नत कृषि, गौ-पालन, शिल्पकारी, हथकरघा, हस्तशिल्प, विशिष्ट शुद्ध भोजन, जैव एवं कृषि विविधता आदि के साथ-साथ अपनी समृद्ध ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को सजोने और उसके वृहद् स्तर पर प्रचार प्रसार का कार्य शुरू कर रहे हैं।

  • पर्यटन वृद्धि के राजस्व में वृद्धि होने के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन भी हो रहा है।  उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 में 24 करोड़ 87 लाख से अधिक पर्यटक आए, जिनमें भारतीय पर्यटकों की संख्या 24 करोड़ 83 लाख एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या 04 लाख 10 हजार से अधिक रही है।
  • स्पिरिचुअल सर्किट योजना के अन्तर्गत गोरखपुर- देवीपाटन डुमरियागंज का पर्यटन विकास, स्पिरिचुअल सर्किट योजना के अन्तर्गत जेवर दादरी सिकन्दराबाद नोएडा - खुर्जा बाँदा का समेकित पर्यटन विकास, जनपद मथुरा स्थित गोवर्धन के पर्यटन विकास हेतु स्वीकृत योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
  • यूपी में खासतौर पर ग्राम पर्यटन पर फोकस किया जा रहा है। राज्य पर्यटन विभाग ने ग्राम्य पर्यटन में असीम संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए कदम बढ़ा दिया है। इसमें देश की युवा पीढ़ी को न सिर्फ ग्राम संस्कृति से रूबरू कराया जाएगा बल्कि ग्रामीण परिवेश, शिल्प और कौशल से भी युवा परिचित हो सकेंगे।
  • मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजनान्तगत प्रदेश में स्थित पर्यटन स्थलों का विकास 300 करोड़ रुपये की धनराशि से कराया जा रहा है।
  • शक्ति पीठ मां शाकुम्भरी देवी मन्दिर के समेकित पर्यटन विकास हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • प्रयागराज के समेकित विकास हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 40 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • बुन्देलखण्ड का समेकित पर्यटन विकास हेतु 40 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • शुकतीर्थ धाम का समेकित पर्यटन विकास हेतु 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • प्रदेश में युवा पर्यटन को बढ़ावा देना हेतु 2 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म, लखनऊ बोर्ड की स्थापना हेतु 2.50 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • अन्तराष्ट्रीय / राष्ट्रीय स्तर के मेगा इवेन्ट हेतु 5 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद हेतु 2.50 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
  • पर्यटन विभाग ने ग्राम्य पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इसी क्रम में पर्यटन विभाग ने ग्राम्य पर्यटन को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। पहले चरण के लिए 18 जिले चिन्हित किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार  के प्रयास-

उत्तर प्रदेश सरकार ने नवंबर 2022 में पर्यटन नीति 2022 को मंजूरी दी। इसके अंतर्गत राज्य के पर्यटन स्थल के साथ ही आठ धार्मिक और आध्यात्मिक टूरिज्म सर्किट को भी विकसित किया जाएगा। जिसके द्वारा रामायण, महाभारत, शक्तिपीठ, कृष्ण, बुद्ध, जैन और सूफ़ी सर्किट के माध्यम से धार्मिक पर्यटन को नया आयाम दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निम्नलिखित प्रयास किए जा रहे है- 

  • मथुरा, वृन्दावन, अयोध्या, प्रयाग, विंध्याचल, नैमिषारण्य, चित्रकूट, कुशीनगर और वाराणसी आदि में सांस्कृतिक व्यवस्था को विकसित करने की योजनाएँ।
  • स्वदेश दर्शन के रामायण सर्किट में अयोध्या में रामकथा गैलरी, गुप्तार घाट, लक्ष्मण घाट एवं अन्य स्रोत पर्यटन राज्यपना सुविधा के विकास आदि के कार्य एवं श्रृंग्वेरपुर (जनपद-इलाहाबाद) में पर्यटक सुविधा केंद्र, घाट एवं अन्य दस्तावेज सुविधाओं के विकास हेतु कार्य ।
  • बौद्ध सर्किट के लिए कुशीनगर, कवि कथा एवं श्रावस्ती में साउण्ड और लाईट शो एवं अन्य सिद्धांत राज्य राज्य अवस्थापन सुविधा के विकास हेतु कार्य ।
  • प्रसाद विन्यास के तहत वाराणसी में पर्यटन विकास कार्यों के लिए रू. 92.92 करोड़ की संख्या करदाता।
  • ब्रज के संपूर्ण एवं समग्र विकास के लिए ब्रज तीर्थ विकास परिषद की स्थापना।
  • विश्व बैंक एवं भारत सरकार के साथ उत्तर प्रदेश प्रो-पुअर पर्यटन विकास परियोजना रू. 371.43 करोड़ का एग्रीमेंट किया गया है।
  • इको दूरिज्म एव वन्यजीव पर्यटन को पहल देने से दुधवा, कतरनिया, चंद्रप्रभा, पूर्वी पक्षी विहार, बखीर पक्षी विहार, कुकरैल, नवाबगंज पक्षी विहार सोहगीबरवा पक्षी विहार आदि का विकास किया जा रहा है।
  • सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु अयोध्या में दीपोत्सव का विश्व कीर्तिमान।
  • वन स्टैप ट्रेवल सलुशन पोर्टल की व्यवस्था।
  • उत्तर प्रदेश की ब्राण्डिंग के लिए “यू.पी. नहीं देखा, तो इंडिया नहीं देखा’ की।  टैग लाइन ब्रांडिंग आदि।
  • वाराणसी के प्रमुख धार्मिक स्थलों को “पावन पथ” के नाम से विकसित किया जाना।
  • प्रदेश के विभिन्न प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलिका-राइड की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

उत्तर प्रदेश में पर्यटन के विकास में विभिन्न चुनौतियां हैं जैसे- वित्तीय संसाधनों की कमी, तकनीकी संसाधनों की समस्या, लोगों में पर्यटकों से संबंधित जागरूकता की कमी, भौतिक और सामाजिक अवसंरचना की कमी आदि। उत्तर प्रदेश में पर्यटन एक नया उभरता हुआ उद्योग है। इसके विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार प्रयासों की रूपांतर पर चर्चा कर रही है। पर्यटन, उत्तर प्रदेश में गरीबी को दूर करने, व्यापक रोजगार आय और ग्रामीण विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में पर्यटन की संभावनाओं को लाभ में परिवर्तित करने के लिए केंद्र, राज्य एवं नागरिक समाज के शामिल प्रयासों की आवश्यकता है। विकास योजनाएँ (जैसे- स्वदेश दर्शन, प्रसाद योजन, हृदय योजना, प्राप्त्य भारत, स्वच्छ भारत, हरित शहर आदि) आदि प्रयासों द्वारा  पर्यटकों के प्रति जन जागरूकता एवं  प्रचार-प्रसार (टूरिज्म मार्केटिंग) आदि प्रयास पर्यटन क्षेत्र द्वारा विकसित किया जा सकता है।

मुख्य परीक्षा आधारित प्रश्न

  1. उत्तर प्रदेश में पर्यटन को उद्योग के रूप में स्थापित करके के लिए क्या प्रयास किए जा रहे है? चर्चा करें।
  2. उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में चर्चा करते हुए यह बताएं कि यह किस प्रकार उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन और विकास में सहायक होगा।

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