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स्विट्जरलैंड ने भारत का 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' का दर्जा लिया वापस! व्यापारिक संबंधों पर कितना पड़ेगा असर?

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स्विट्जरलैंड ने हाल ही में भारत को दिए गए 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) का दर्जा वापस ले लिया है। यह फैसला भारत और स्विट्जरलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के प्रावधानों और भारत के सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण निर्णय के बाद लिया गया है। यह कदम दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों और निवेश प्रवाह पर गहरा असर डाल सकता है।

क्या है 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' का दर्जा?

'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) एक ऐसा दर्जा है जो वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) के नियमों के तहत सदस्य देशों को दिया जाता है। इस दर्जे का उद्देश्य व्यापार में भेदभाव रहित व्यवहार सुनिश्चित करना और समानता बनाए रखना है। डब्ल्यूटीओ के सामान्य टैरिफ और व्यापार समझौते (General Agreement on Tariffs and Trade - GATT, 1994) के अनुच्छेद 1 के अनुसार, हर सदस्य देश को अन्य सभी सदस्य देशों के साथ व्यापारिक लाभ और रियायतें समान रूप से प्रदान करनी होती हैं। यह व्यवस्था व्यापारिक संबंधों में निष्पक्षता और पारदर्शिता को बढ़ावा देती है।

भारत और स्विट्जरलैंड का व्यापारिक रिश्ता

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) लागू था। यह समझौता दोनों देशों की कंपनियों को व्यापार में टैक्स में राहत देने के साथ-साथ मुनाफा बढ़ाने में मदद करता था। MFN का दर्जा भी इसी समझौते का हिस्सा था। स्विट्जरलैंड का यह निर्णय भारत के सुप्रीम कोर्ट के 2023 के एक अहम फैसले के बाद आया है। नेस्ले से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट तब तक लागू नहीं हो सकता, जब तक इसे भारतीय इनकम टैक्स एक्ट के तहत अधिसूचित न किया जाए। नेस्ले, जिसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड में स्थित है, को इस फैसले के बाद टैक्स छूट में समस्या का सामना करना पड़ा।

फैसले के बाद का प्रभाव

स्विट्जरलैंड द्वारा MFN दर्जा वापस लेने के बाद, 1 जनवरी 2025 से भारतीय कंपनियों को स्विट्जरलैंड में अपनी कमाई पर 10% टैक्स का भुगतान करना होगा। यह पहले की तुलना में अधिक है और इसका असर भारतीय कंपनियों की मुनाफाखोरी पर पड़ सकता है।

व्यापार और निवेश पर प्रभाव

  1. भारतीय कंपनियों पर असर: स्विट्जरलैंड में कारोबार कर रही भारतीय कंपनियों के लिए टैक्स की बढ़ी हुई दरें मुनाफे को प्रभावित करेंगी।

  2. स्विस निवेश पर असर: टैक्स बढ़ोतरी के कारण स्विट्जरलैंड से भारत में होने वाले निवेश में गिरावट आ सकती है। स्विस कंपनियां अब भारत में निवेश करने से पहले अधिक सतर्कता बरत सकती हैं।

  3. व्यापारिक संबंधों पर प्रभाव: भारत और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों में अस्थिरता आ सकती है, क्योंकि MFN का दर्जा दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने में मददगार था।

सरकार की प्रतिक्रिया

इस फैसले पर भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान दिया कि इसे यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (European Free Trade Association - EFTA) के संदर्भ में देखा जा रहा है। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापारिक समझौतों पर पुनर्विचार की आवश्यकता होगी।

क्या है आगे का रास्ता?

'मोस्ट फेवर्ड नेशन' का दर्जा किसी भी देश को व्यापार में प्राथमिकता और शुल्क में छूट देता है। विकासशील देशों के लिए यह दर्जा अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करता है। हालांकि, स्विट्जरलैंड और भारत के मामले में यह विवाद कानूनी रूप से जटिल है। WTO के नियमों के तहत MFN का दर्जा सुरक्षा कारणों या कानूनी विवादों के चलते समाप्त किया जा सकता है। लेकिन भारत और स्विट्जरलैंड के बीच इसे लेकर जो स्थिति बनी है, वह आपसी व्यापारिक समझौतों पर पुनर्विचार की मांग करती है।

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