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समुद्र में मछलियों की जगह प्लास्टिक? दुनिया के लिए चेतावनी की घंटी!

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क्या आपने कभी समुद्र किनारे खड़े होकर लहरों की आवाज सुनी है? ठंडी हवा का एहसास किया है? यह दृश्य जितना सुकून देने वाला है, उतना ही डरावना बन सकता है, जब आपके सामने समुद्र के किनारे सिर्फ प्लास्टिक कचरा नजर आए। आज, हमारे पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्लास्टिक प्रदूषण बन चुकी है। हर साल करीब 400 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें से केवल 9% ही रिसाइकिल किया जाता है। बाकी का कचरा नदियों, समुद्रों, जंगलों और शहरों में फैल जाता है।

समुद्रों में प्लास्टिक का अंबार-

हर साल लगभग 8 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा समुद्रों में चला जाता है। यह मछलियों के लिए खतरनाक है क्योंकि वे इसे भोजन समझकर निगल लेती हैं। इसके बाद यही प्लास्टिक हमारे खाने में शामिल होकर हमारी थाली तक पहुंच जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो 2050 तक समुद्रों में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक होगा।

बुसान में 175 देशों की बैठक-

हाल ही में, दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में 175 देशों के प्रतिनिधियों ने प्लास्टिक प्रदूषण पर चर्चा की। इस बैठक का उद्देश्य एक वैश्विक कानूनी संधि तैयार करना था, जिससे प्लास्टिक का उत्पादन कम हो और इसका बेहतर प्रबंधन हो सके।

हालांकि, इस पर अभी भी कई देशों में मतभेद हैं।

  • सऊदी अरब ने प्लास्टिक उत्पादन पर रोक का विरोध किया है।
  • भारत ने विकासशील देशों के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता की मांग की है, ताकि वे इस बदलाव के साथ तालमेल बिठा सकें।

समाधान क्या है?

समस्या का हल ढूंढने के लिए हमें प्रकृति और विज्ञान का सहारा लेना होगा।

  1. जैविक प्लास्टिक: मकई, गन्ना और आलू जैसे प्राकृतिक स्रोतों से बने जैविक प्लास्टिक पर्यावरण में जल्दी खत्म हो जाते हैं।
  2. प्राकृतिक विकल्प: जूट, कपड़ा और कागज का उपयोग बढ़ाना चाहिए।
  3. तकनीकी सहायता:
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से कचरा प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
  • ड्रोन तकनीक समुद्र और दुर्गम क्षेत्रों में कचरा साफ करने में कारगर हो सकती है।

भारत ने क्या उठाए कदम?

भारत ने 2021 में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाकर एक बड़ा कदम उठाया था। इसके अलावा, 2030 तक प्लास्टिक पैकेजिंग को 100% रिसाइकिल या रियूज करने का लक्ष्य रखा गया है। यह सकारात्मक दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन असली चुनौती आम लोगों में जागरूकता लाने की है।

हमारी क्या होनी चाहिए भूमिका?

  • यह सिर्फ सरकारों और संगठनों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति को अपनी आदतें बदलनी होंगी।
  • प्लास्टिक बैग की जगह जूट या कपड़े के बैग का उपयोग करें।
  • सिंगल यूज प्लास्टिक से बचें।
  • बच्चों और समाज को प्लास्टिक प्रदूषण के खतरों के बारे में जागरूक करें।

वैश्विक प्रयासों से उम्मीद

बुसान बैठक से एक वैश्विक संधि की उम्मीद जगी है। लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब हर देश, हर व्यक्ति इस दिशा में कदम उठाएगा। यदि हम प्लास्टिक का उपयोग छोड़ दें, तो हम न केवल अपने पर्यावरण को बचा सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एक साफ और सुरक्षित दुनिया दे सकते हैं। यह लड़ाई सिर्फ एक सरकार या संगठन की नहीं है, यह हम सभी की है। समुद्र और मछलियों को प्लास्टिक के अंबार से बचाना है, तो आज से ही पहल करनी होगी। क्या आप तैयार हैं?

 

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