हाल ही में एक खतरनाक वायरस ने दुनिया भर में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। यह वायरस, जिसे मारबर्ग वायरस कहा जाता है, किसी इंसान की आंखों, नाक और मुंह से खून बहने की घटना का कारण बन सकता है, और इस महामारी की मृत्यु दर 50% से 88% तक हो सकती है। यह वायरस, इबोला वायरस के परिवार का सदस्य है, और इसकी पहचान फिलोवायरस फैमिली से की जाती है।
कैसे पड़ा इस वायरस का नाम?
मारबर्ग वायरस का नाम 1967 में जर्मनी के मारबर्ग शहर से पड़ा, जहां इसने पहली बार खतरनाक प्रकोप का रूप लिया था। लेकिन, हाल के वर्षों में अफ्रीकी देशों में यह वायरस तेजी से फैल चुका है। यह बीमारी "ब्लीडिंग आई डिजीज" के नाम से जानी जाती है, क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर शरीर के अंगों से खून बहने का कारण बनती है। इस वायरस के कारण लगभग 50% मामलों में मौत हो जाती है, और कुछ गंभीर मामलों में यह दर 88% तक पहुंच सकती है।
मारबर्ग वायरस का प्रसार-
मारबर्ग वायरस का मुख्य स्रोत चमगादड़ हैं, विशेष रूप से Rousettus bat। ये संक्रमित चमगादड़ अपने मल, मूत्र या लार के जरिए इस वायरस को फैलाते हैं। जब इंसान इन चमगादड़ों के संपर्क में आता है या संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों, जैसे खून, पसीना या थूक, के संपर्क में आता है, तो वायरस फैल सकता है। यही कारण है कि एक बार संक्रमण शुरू होने के बाद इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है।
मारबर्ग वायरस के लक्षण-
मारबर्ग वायरस के लक्षण आमतौर पर फ्लू जैसे होते हैं, जो इसे शुरूआत में पहचानने में मुश्किल बना सकते हैं। शुरुआती लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं। जैसे-जैसे वायरस बढ़ता है, इसके लक्षण और भी खतरनाक हो जाते हैं। मरीज की आंखों, नाक और मुंह से खून बहने लगता है, पेट में तेज दर्द, खून की उल्टियां और मल में खून आना आम हो जाता है। गंभीर मामलों में शरीर के अंगों का काम करना बंद हो जाता है और मरीज की मौत हो जाती है।
मारबर्ग वायरस की गंभीरता-
मारबर्ग वायरस कोई नया खतरा नहीं है। 2012 में युगांडा में इस वायरस ने 15 लोगों को संक्रमित किया, जिसमें से चार की मौत हो गई। 2023 में इक्वेटोरियल गिनी में इस वायरस ने 16 लोगों को संक्रमित किया, और 12 लोगों की जान ले ली। अब अफ्रीका के 17 से अधिक देशों में इसका प्रकोप फैल चुका है।
कोविड-19 से भी ज्यादा हो सकता है खतरनाक-
मारबर्ग वायरस कोविड-19 से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। जहां कोविड-19 की मृत्यु दर 2.7% से 4% के बीच थी, वहीं मारबर्ग की मृत्यु दर 50% से अधिक है। कोविड-19 के लिए टीका और इलाज उपलब्ध हैं, लेकिन मारबर्ग वायरस के लिए न तो कोई टीका है और न ही कोई विशेष इलाज। यही कारण है कि यह वायरस और भी जानलेवा साबित हो सकता है।
जानिए बचाव के उपाय-
मारबर्ग वायरस से बचने का सबसे अच्छा तरीका सावधानी बरतना है। विशेष रूप से संक्रमित क्षेत्रों में यात्रा से बचें, खासकर उन जगहों पर जहां चमगादड़ों का निवास होता है, जैसे खदानें और गुफाएं। संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से बचें, और हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें। इसके अलावा, लोगों को इस खतरनाक वायरस के बारे में जागरूक करना भी बेहद महत्वपूर्ण है।
कड़ी निगरानी और सावधानियों की आवश्यकता-
मारबर्ग वायरस का खतरा गंभीर है, और इसके प्रसार को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर कड़ी निगरानी और सावधानियों की आवश्यकता है। इस वायरस के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता और सावधानी ही सबसे प्रभावी उपाय हैं।