सांसदों को वेतन और भत्तों के रूप में कई सुविधाएं दी जाती हैं, जिनमें स्वास्थ्य, आवास, यात्रा, और ऑफिस खर्च शामिल हैं। आइए जानते हैं कि सरकार एक सांसद पर हर महीने कितनी राशि खर्च करती है।
सांसदों की सैलरी और पेंशन-
प्रत्येक सांसद को सरकार से ₹1 लाख रुपये मासिक वेतन मिलता है। यह राशि सभी सांसदों के लिए समान होती है, चाहे वह राज्यसभा के हों या लोकसभा के। कार्यकाल समाप्त होने के बाद सांसदों को ₹25,000 रुपये मासिक पेंशन भी दी जाती है।
मोबाइल और इंटरनेट खर्च-
सांसदों के मोबाइल और इंटरनेट उपयोग के लिए सरकार सालाना ₹1.5 लाख रुपये प्रदान करती है। यह राशि कॉलिंग, इंटरनेट, और ब्रॉडबैंड खर्चों को कवर करती है। इसके अतिरिक्त, कार्यालय खर्चों के लिए सांसदों को हर महीने ₹62,000 रुपये मिलते हैं।
मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं-
सांसद और उनके परिवार के सभी सदस्यों के इलाज का खर्च सरकार उठाती है। यह सुविधा बिना किसी सीमा के उपलब्ध होती है, जिससे उन्हें देश के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज मिलता है।
आवास और अन्य घरेलू सुविधाएं-
सांसदों को सरकारी आवास आवंटित किया जाता है। इस आवास में उन्हें सालाना 50,000 यूनिट मुफ्त बिजली और 4,000 किलोलीटर (40 लाख लीटर) मुफ्त पानी दिया जाता है।
यात्रा सुविधाएं-
सांसदों को यात्रा के लिए भी विशेष भत्ते दिए जाते हैं।
- रेल यात्रा: सांसद किसी भी समय फर्स्ट एसी में मुफ्त यात्रा कर सकते हैं।
- हवाई यात्रा: हर महीने तीन घरेलू हवाई यात्राओं की सुविधा मुफ्त उपलब्ध है।
कुल मासिक खर्च
सांसदों की सैलरी, मोबाइल भत्ता, कार्यालय खर्च, स्वास्थ्य सुविधाएं, और यात्रा भत्तों को जोड़कर देखें तो सरकार एक सांसद पर हर महीने औसतन ₹6 लाख से ₹7 लाख रुपये खर्च करती है।
क्या यह खर्च जायज है?
यह सवाल अक्सर उठता है कि सांसदों पर होने वाला इतना खर्च क्या वाजिब है? सांसदों की जिम्मेदारियां और उनके द्वारा किए गए कार्यों को देखते हुए यह खर्च कई बार उचित लगता है, लेकिन दूसरी तरफ देश के करदाताओं पर इसका भार भी विचारणीय है। संसद में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है, और यह सुविधाएं उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाने के लिए दी जाती हैं। हालांकि, इस पर भी चर्चा होनी चाहिए कि इन खर्चों का सही उपयोग हो रहा है या नहीं।
एक सांसद पर क्या इतना खर्च है जायज़?
सांसदों को दी जाने वाली सुविधाएं न केवल उनकी जिम्मेदारियों को आसान बनाती हैं, बल्कि उन्हें जनता के प्रति जवाबदेह भी बनाती हैं। लेकिन समय-समय पर इन भत्तों और सुविधाओं की समीक्षा आवश्यक है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनका लाभ सही दिशा में जा रहा है। लेकिन सवाल ये उठता है कि एक सांसद पर हर महीने का 6 से 7 लाख तक खर्च कितनी हद तक जायज़ है।