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हमेशा-हमेशा के लिए मौन हो गई भारतीय राजनीति की सबसे धीमी आवाज...

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भारतीय राजनीति की सबसे धीमी आवाज, जो आज हमेशा-हमेशा के लिए मौन हो गई है। उनकी आवाज जरूर धीमी थी, मगर बेहद असरदार थी। आरबीआई गवर्नर से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक उन्होंने सभी पदों की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। राजनीति के ऐसे पुरोधा थे पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह, कि जब भी कोई बड़ा फैसला लेते थे, तो वह भारत को आगे बढ़ाने के हित में होता था। आज वह अपनी जिंदगी के अंतिम सफर पर पहुंच चुके हैं।

सेना की सलामी के साथ अंतिम विदाई

डॉ. मनमोहन सिंह के पार्थिव शरीर को सेना की तोपगाड़ी पर दिल्ली के निगमबोध घाट लाया गया। यहां तीनों सेनाओं ने उन्हें राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी। इसके बाद अंतिम संस्कार की रस्में शुरू हुईं।

वैश्विक और राष्ट्रीय नेतृत्व ने दी डॉ. मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि:

पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह आदि ने निगम बोध घाट पर मनमोहन सिंह को दी अंतिम श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जताई राष्ट्र की संवेदना

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने निगमबोध घाट पर पहुंचकर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। यह पल न केवल व्यक्तिगत सम्मान का, बल्कि एक राष्ट्र की ओर से अपने महान नेता को विदाई देने का प्रतीक बना। राष्ट्रपति ने डॉ. सिंह की सादगी, विद्वता और देश के प्रति उनकी अमूल्य सेवाओं को याद करते हुए उनके योगदान को नमन किया। उनकी श्रद्धांजलि में झलकता आदर पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत रहा, जो इस महान नेता के प्रति गहरी संवेदना और सम्मान का दर्पण था।

भूटान के राजा और मॉरीशस के विदेश मंत्री ने दी भावपूर्ण विदाई

डॉ. मनमोहन सिंह के प्रति वैश्विक सम्मान का प्रतीक रहा कि भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और मॉरीशस के विदेश मंत्री मनीष गोबिन भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने निगमबोध घाट पहुंचे। उनकी उपस्थिति ने डॉ. सिंह के अंतरराष्ट्रीय कद और उनके योगदान को उजागर किया।

सोनिया गांधी की श्रद्धांजलि: विदाई का भावुक क्षण

कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने डॉ. मनमोहन सिंह को अंतिम विदाई देते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मौजूद रहे। यह क्षण कांग्रेस परिवार के लिए बेहद भावुक था, जहां डॉ. सिंह के योगदान को आदरपूर्वक याद किया गया।

अंतिम संस्कार बना राष्ट्रीय एकता और सम्मान का प्रतीक

डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय नेताओं के लिए भी आदर और श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर बना। उनके सादगीपूर्ण व्यक्तित्व और महान योगदान ने उन्हें हर दिल अजीज बना दिया।

परिवार ने दी विदाई

डॉ. मनमोहन सिंह की बड़ी बेटी उपिंदर सिंह (65), दूसरी बेटी दमन सिंह (61), और तीसरी बेटी अमृत सिंह (58) निगमबोध घाट पर मौजूद रहीं। परिवार ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।

कांग्रेस नेताओं और देश के शीर्ष नेतृत्व ने अर्पित की श्रद्धांजलि

निगमबोध घाट पर सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस के बड़े नेताओं ने डॉ. सिंह को श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी अंतिम विदाई में शामिल हुए।

नीली पगड़ी में विदा हुए 'नीली पगड़ी के सिग्नेचर'

अंतिम संस्कार के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी पसंदीदा नीली पगड़ी पहनाई गई। यह रंग उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की स्मृति में चुना था और इसे अपनी पहचान बना लिया था।

कांग्रेस मुख्यालय से निगमबोध घाट तक अंतिम यात्रा

सुबह 9:30 बजे डॉ. मनमोहन सिंह की पार्थिव देह उनके आवास से कांग्रेस मुख्यालय लाई गई। यहां नेताओं और जनता ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद अंतिम यात्रा शुरू हुई। राहुल गांधी पार्थिव शरीर के साथ गाड़ी में मौजूद रहे।

गुरुवार रात 92 वर्ष की आयु में हुआ निधन

डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार रात 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बेहोशी की हालत में उन्हें रात 8:06 बजे दिल्ली के AIIMS अस्पताल लाया गया। हॉस्पिटल बुलेटिन के अनुसार, रात 9:51 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

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