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एक ऐप जिसने सरकारी दफ्तरों की लाइनें खत्म कर दीं -जन सुनवाई ऐप: यूपी में शिकायत नहीं, अब सीधे समाधान

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एक ऐप जिसने सरकारी दफ्तरों की लाइनें खत्म कर दीं -जन सुनवाई ऐप: यूपी में शिकायत नहीं, अब सीधे समाधान

लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर, फाइलों की देरी और “कल आइए” जैसे जवाब आम नागरिक की रोजमर्रा की परेशानी रहे हैं। डिजिटल दौर में यह तस्वीर तेजी से बदली है। अब किसी भी समस्या के समाधान के लिए दफ्तर जाना जरूरी नहीं रहा। मोबाइल के जरिए ही शिकायत दर्ज हो रही है और उस पर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जा रही है। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह है जन सुनवाई

क्या है जन सुनवाई

जन सुनवाई उत्तर प्रदेश सरकार की डिजिटल शिकायत निवारण व्यवस्था है, जो मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित होती है। इसके जरिए कोई भी नागरिक, किसी भी स्थान से, किसी भी विभाग से जुड़ी समस्या सीधे सिस्टम में दर्ज कर सकता है। यह व्यवस्था नागरिक और प्रशासन के बीच सीधा, पारदर्शी और समयबद्ध संवाद स्थापित करती है।

शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया

जन सुनवाई पर शिकायत दर्ज करना सरल रखा गया है। मोबाइल नंबर से लॉगिन करने के बाद समस्या का विवरण दर्ज किया जाता है। शिकायत सबमिट होते ही एक यूनिक संदर्भ संख्या मिलती है, जिसके माध्यम से शिकायत की स्थिति को किसी भी समय ट्रैक किया जा सकता है। यही संदर्भ संख्या पूरी प्रक्रिया के दौरान पहचान का आधार बनती है।

सिस्टम कैसे करता है काम

शिकायत दर्ज होते ही वह स्वतः संबंधित विभाग को भेज दी जाती है। हर शिकायत के लिए निस्तारण की एक तय समय-सीमा होती है और जिम्मेदार अधिकारी निर्धारित किया जाता है। शिकायतकर्ता को हर चरण की जानकारी मोबाइल पर मिलती रहती है। यदि समाधान संतोषजनक नहीं होता, तो वही शिकायत उच्च स्तर तक स्वतः अग्रेषित हो जाती है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

किन समस्याओं पर सबसे ज्यादा शिकायतें

जन सुनवाई पर आने वाली शिकायतें आम जीवन से जुड़ी होती हैं। बिजली आपूर्ति और ट्रांसफॉर्मर, पुलिस थानों में सुनवाई, राजस्व और भूमि विवाद, राशन कार्ड, पेंशन, आवास योजनाएं, नगर निगम की सफाई और जलभराव जैसे मुद्दों पर सबसे अधिक शिकायतें दर्ज होती हैं। इन मामलों में समयबद्ध कार्रवाई से लोगों का भरोसा लगातार बढ़ा है।

आंकड़े क्या संकेत देते हैं

हर महीने बड़ी संख्या में शिकायतें जन सुनवाई प्लेटफॉर्म पर दर्ज होती हैं। प्रशासनिक स्तर पर जिलाधिकारी और मंडलीय अधिकारी इनकी नियमित समीक्षा करते हैं। राज्य स्तर पर भी पूरी व्यवस्था की निगरानी की जाती है, जिससे निस्तारण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जा सके।

प्रशासन पर क्या पड़ा असर

जन सुनवाई ने अधिकारियों के कामकाज में पारदर्शिता लाई है। हर शिकायत रिकॉर्ड में रहती है, हर कार्रवाई ट्रैक होती है और देरी होने पर जवाबदेही तय होती है। इस व्यवस्था ने प्रशासन को अधिक उत्तरदायी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आम लोगों का अनुभव

ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक लोगों का अनुभव बताता है कि अब शिकायत करना बेकार नहीं लगता। पहले जहां शिकायतें अक्सर अनसुनी रह जाती थीं, अब वहीं समाधान की उम्मीद बनी है। नागरिकों का मानना है कि सिस्टम के भीतर निगरानी होने से अधिकारियों में भी जवाब देने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

नेतृत्व की सोच और शासन मॉडल

जन सुनवाई उस शासन दृष्टि का हिस्सा है, जिसमें जवाबदेही और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत किया गया है। जन सुनवाई उसी सोच का व्यावहारिक रूप है, जिसमें तकनीक के माध्यम से शासन को नागरिकों के और करीब लाया गया है।

आगे की दिशा

आने वाले समय में जन सुनवाई प्रणाली को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। शिकायतों के बेहतर वर्गीकरण, तेज फॉलो-अप और फील्ड स्तर पर की गई कार्रवाई की डिजिटल रिपोर्टिंग जैसी सुविधाओं से समाधान प्रक्रिया को और मजबूत करने की तैयारी है।

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