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भारत: दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर — 5 बड़े कारण

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भूमिका: एक ऐतिहासिक अवसर

जब वर्ष 1991 में भारत ने आर्थिक उदारीकरण की नीति अपनाई, तब किसी ने शायद ही सोचा था कि एक दिन भारत जापान और जर्मनी जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ देगा। लेकिन आज यह संभावना वास्तविकता बनने की कगार पर है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताज़ी रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

वर्तमान में भारत की GDP लगभग 3.7 ट्रिलियन डॉलर है और यह विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। लेकिन 6.5% से 7% की वार्षिक वृद्धि दर के साथ, भारत जापान (4.2 ट्रिलियन डॉलर) और जर्मनी (4.4 ट्रिलियन डॉलर) को पीछे छोड़ने की स्थिति में है। यह लेख उन 5 प्रमुख कारणों की पड़ताल करता है जो भारत को यह ऐतिहासिक मुकाम दिलाने में सहायक हैं।

कारण 1: जनसांख्यिकीय लाभांश — युवा भारत की शक्ति

भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। यहाँ की औसत आयु मात्र 28 वर्ष है, जबकि जापान में 49 वर्ष और जर्मनी में 47 वर्ष है। इसका अर्थ यह है कि भारत के पास एक विशाल और उत्पादक कार्यबल उपलब्ध है जो अगले 25-30 वर्षों तक देश की आर्थिक वृद्धि को गति दे सकता है।

विश्व बैंक के अनुसार, भारत में प्रति वर्ष लगभग 1.2 करोड़ युवा श्रम बाज़ार में प्रवेश करते हैं। यदि इन युवाओं को उचित कौशल प्रशिक्षण और रोज़गार के अवसर मिलें, तो भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को अभूतपूर्व रूप से मज़बूत कर सकता है। स्किल इंडिया, पीएम कौशल विकास योजना जैसे कार्यक्रम इसी दिशा में काम कर रहे हैं।

अध्ययन बताते हैं कि जनसांख्यिकीय लाभांश से भारत की GDP में प्रतिवर्ष लगभग 1-1.5 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। यह लाभ चीन के पास 2015 के बाद से समाप्त हो चुका है क्योंकि चीन की जनसंख्या तेजी से बूढ़ी हो रही है।

 

कारण 2: Make in India और PLI योजना — विनिर्माण क्रांति

सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजना ने भारतीय अर्थव्यवस्था में एक नई जान फूँकी है। 14 प्रमुख क्षेत्रों में लागू इस योजना ने लगभग 1.97 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है और 6 लाख से अधिक रोज़गार सृजित किए हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में PLI का असर सबसे स्पष्ट दिखता है। एप्पल अब भारत में अपने iPhone का उत्पादन कर रही है। फॉक्सकॉन, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन जैसी कंपनियों ने भारत में अरबों डॉलर का निवेश किया है। सेमीकंडक्टर उत्पादन के क्षेत्र में भी भारत ने बड़े कदम उठाए हैं — माइक्रोन टेक्नोलॉजी गुजरात में 2.75 अरब डॉलर का संयंत्र लगा रही है।

Make in India पहल के तहत रक्षा उत्पादन में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। घरेलू रक्षा उत्पादन 2023-24 में 1.27 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। भारत अब तेज़ी से आयातक से निर्यातक देश बन रहा है।

कारण 3: डिजिटल अर्थव्यवस्था — फिनटेक और UPI क्रांति

भारत की डिजिटल क्रांति दुनिया के लिए एक मिसाल बन गई है। UPI (Unified Payments Interface) के माध्यम से अब प्रतिमाह 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन हो रहे हैं। भारत विश्व में सबसे अधिक रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट करने वाला देश बन चुका है।

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत इंटरनेट कनेक्टिविटी तेज़ी से बढ़ी है। आज भारत में 90 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं। आधार, जैम ट्रिनिटी (जन धन, आधार, मोबाइल) और डिजिटल लोकर जैसी पहलों ने वित्तीय समावेशन को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है।

भारत का आईटी और सेवा क्षेत्र देश की GDP का लगभग 7.5% योगदान देता है और 50 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार देता है। बेंगलुरू, हैदराबाद, पुणे जैसे शहर वैश्विक तकनीक केंद्र के रूप में उभरे हैं। इसके अलावा स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है जिसमें 100 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियाँ शामिल हैं।

कारण 4: बुनियादी ढाँचे में क्रांतिकारी निवेश

प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत भारत सरकार ने बुनियादी ढाँचे पर रिकॉर्ड खर्च करना शुरू किया है। 2024-25 के बजट में पूँजीगत व्यय के लिए 11.11 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जो GDP का लगभग 3.4% है।

राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में तेज़ी से विस्तार हो रहा है। प्रतिदिन औसतन 28-30 किलोमीटर नए राजमार्ग बन रहे हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ रेल नेटवर्क का आधुनिकीकरण हो रहा है। UDAN योजना के तहत हवाई संपर्क का विस्तार हुआ है और आज भारत में 150 से अधिक हवाई अड्डे सक्रिय हैं।

बंदरगाह क्षेत्र में सागरमाला परियोजना के तहत 800 से अधिक परियोजनाएँ चल रही हैं। इससे निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। ऊर्जा क्षेत्र में भारत ने 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है।

कारण 5: भू-राजनीतिक लाभ — China+1 रणनीति

चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध और कोविड-19 महामारी के बाद से दुनिया भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को चीन से बाहर विविधीकृत करना चाहती हैं। इस China+1 रणनीति से भारत को सर्वाधिक लाभ मिल रहा है।

भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, अंग्रेजी भाषी कार्यबल, स्थापित कानूनी ढाँचा और विशाल घरेलू बाज़ार इसे चीन के विकल्प के रूप में आकर्षक बनाते हैं। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देश भारत के साथ अपने आर्थिक संबंध तेज़ी से बढ़ा रहे हैं। India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) भारत को वैश्विक व्यापार का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

चुनौतियाँ जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता

भारत की आर्थिक यात्रा में कई गंभीर चुनौतियाँ भी हैं। बेरोज़गारी दर, विशेष रूप से युवाओं में, चिंताजनक स्तर पर है। कृषि क्षेत्र में संकट जारी है जो GDP का केवल 15% योगदान करता है लेकिन 45% आबादी को रोज़गार देता है। लैंगिक असमानता में भारत विश्व में बहुत पीछे है — महिला श्रम भागीदारी दर केवल 23% है।

इसके अलावा, आय असमानता, क्षेत्रीय असमानता, शिक्षा की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं में कमी जैसी समस्याएँ भी GDP वृद्धि के लाभों को व्यापक रूप से वितरित होने से रोकती हैं।

निष्कर्ष

भारत का तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना न केवल एक आर्थिक उपलब्धि होगी, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को भी नई दिशा देगा। युवा जनसंख्या, डिजिटल क्रांति, विनिर्माण पुनरुद्धार, बुनियादी ढाँचे में निवेश और भू-राजनीतिक अनुकूलता — ये पाँच स्तंभ भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षा को वास्तविकता में बदलने की क्षमता रखते हैं। लेकिन इस सफलता को समावेशी बनाने के लिए सामाजिक निवेश, शासन सुधार और पर्यावरणीय स्थिरता पर भी समान ध्यान देना होगा।

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