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दुनिया भर में क्यों बढ़ रहे इस खास उम्र के लोगों में Colon Cancer के मामले? जानिए क्या हैं रीजन्स...

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कैंसर आज के समय में एक ऐसी गंभीर बीमारी बन चुकी है, जो दुनियाभर में लाखों लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर रही है। यह बीमारी न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि मानसिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी भारी प्रभाव डालती है। भारत में कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे यह एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है।

क्या है कोलोन कैंसर?

कैंसर कई प्रकार का होता है और यह शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करता है। और इन्हीं में से एक है कोलन कैंसर (Colon Cancer), जिसे बॉवेल कैंसर के नाम से भी जाना जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह बीमारी, जो पहले आमतौर पर बुजुर्गों में देखी जाती थी, अब तेजी से युवाओं को अपना शिकार बना रही है। इसके बढ़ते मामले एक गंभीर चिंता का विषय हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

क्या कहती है नई स्टडी?

हालिया शोध में यह खुलासा हुआ है कि 50 साल से कम उम्र के लोगों में कोलन कैंसर के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। हालांकि, इसके स्पष्ट कारण अब तक पूरी तरह से समझ नहीं आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खराब जीवनशैली, असंतुलित आहार, मोटापा, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं इसके पीछे की मुख्य वजहें हो सकती हैं। आइए जानते हैं कोलन कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों के बारे में।

1. मोटापा: एक बड़ा कारण

मोटापा न केवल हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा बढ़ाता है, बल्कि यह कोलन कैंसर का भी एक बड़ा कारण बन सकता है। अधिक वजन वाले लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। पुरुषों में यह संबंध और भी ज्यादा देखा गया है।

समाधान:

नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से स्वस्थ वजन बनाए रखें।

2. टाइप-2 डायबिटीज: कैंसर का छिपा जोखिम

डायबिटीज से पीड़ित लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन का उच्च स्तर इस खतरे को बढ़ा सकता है। डायबिटीज और कोलोरेक्टल कैंसर दोनों का संबंध मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी से है।

समाधान:

ब्लड शुगर स्तर को नियंत्रित रखें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।

3. असंतुलित आहार: रेड और प्रोसेस्ड मीट का सेवन

रेड मीट (बीफ, पोर्क, लैम्ब) और प्रोसेस्ड मीट (जैसे हॉट डॉग, सॉसेज) का अधिक सेवन कोलोरेक्टल कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।

इनमें पाए जाने वाले हानिकारक रसायन आंतों को नुकसान पहुंचाते हैं।

समाधान:

अपने आहार में अधिक फल, सब्जियां, और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।

4. स्मोकिंग: धूम्रपान का दुष्प्रभाव

लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। धूम्रपान से कोलन में पॉलीप्स (छोटे गांठ) बनने का खतरा बढ़ता है, जो बाद में कैंसर का रूप ले सकते हैं।

समाधान:

तुरंत धूम्रपान छोड़ें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।

5. शराब का सेवन: सेहत पर गहरा असर

शराब का अत्यधिक सेवन कोलोरेक्टल कैंसर का एक बड़ा कारण है। विशेषज्ञों का कहना है कि शराब की हर मात्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।

समाधान:

शराब से पूरी तरह परहेज करें, क्योंकि यह कैंसर के जोखिम को कम करने का सबसे सुरक्षित तरीका है।

सावधानी ही बचाव है-

कोलन कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, और नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी हैं। खासकर युवाओं को अपने स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देना चाहिए। सही जानकारी और समय पर उठाए गए कदम न केवल इस बीमारी से बचाव कर सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ जीवन की ओर भी ले जाते हैं।

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