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बीस से तीस साल के लोगों के दिमाग और रीढ़ की हड्डी पर हमला करती है ये बीमारी!

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हमारे शरीर में एक ऐसा तंत्र मौजूद होता है, जो हमारे शरीर को कई अक्रांता रूपी बीमारियों से बचाता है। जिसे प्रतिरक्षा तंत्र कहा जाता है। यह संक्रमण से हमारी शरीर की रक्षा करता है औऱ हमारे शरीर पर हमला करने वाले कीटाणुओं को मारता है एवं हमें स्वस्थ रखने में मदद करता है। लेकिन एक ऐसी बीमारी जिसमें जिसमें शरीर गलती से खुद पर हमला कर देता है। इसे मल्टीपल स्केलेरोसिस (एमएस) के नाम से जाना जाता है। यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। एमएस एक अप्रत्याशित बीमारी है जो लोगों को अलग-अलग तरह से प्रभावित करती है। इसीलिए लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक करने के लिए 30 मई को वर्ल्ड मल्टीपल स्क्लेरोसिस डे के रूप में मनाया जाता है।

पच्चीस लाख से ज्यादा हैं प्रभावित-

इस बीमारी से विश्‍व में लगभग 25 लाख लोग जूझ रहे हैं। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज का अपने शरीर से नियंत्रण खत्‍म होता चला जाता है और वह कमजोर होने के साथ ही चलने-फिरने के योग्‍य भी नहीं रह जाता है। इसके कुछ लक्षण लकवा से भी मिलते हैं। स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि ये 20 से 30 साल के उम्र के लोगों को ज्यादा प्रभावित करती है। 

मल्टीपल स्क्लेरोसिस किस अंग को करता है प्रभावित

मल्टीपल स्क्लेरोसिस एक क्रोनिक ऑटोइम्यून और न्यूरोलॉजिकल डिजीज है जो ब्रेन और रीढ़ की की हड्डी की नसों और ऑप्टिक नर्व को प्रभावित करती है। इस बीमारी में बॉडी अपने ही नर्वस को प्रोटेक्ट करने वाले मायलिन की लेयर पर हमला करती है। चिंता की बात यह है कि यह बीमारी समय के साथ नसों को स्थायी रूप से डैमेज कर देती है।

इस प्रकार के हो सकते हैं लक्षण-

  • हाथ या पैर अचानक काम करना बंद कर सकते हैं।
  • इस बीमारी के होने पर कुछ ही घंटों या पलों में आंख की रोशनी जा सकती है. यह एकदम एक्‍यूट होता है।
  •  एक चीज दो भी दिखाई दे सकती हैं। यानि डबल विजन की समस्‍या।
  •  बोलने में समस्‍या या उच्‍चारण का स्‍पष्‍ट न होना।
  • थकान, तनाव और शरीर में दर्द रहना।
  • शरीर में या किसी अंग में झनझनाहट।

मल्‍टीपल स्‍क्‍लेरोसिस होने के क्या कारण हो सकते हैं?

मल्‍टीपल स्‍क्‍लेरोसिस होने का विटामिन डी एक बड़ा कारण हो सकता है। अगर किसी के शरीर में इस विटामिन की कमी है तो मरीज को बार बार मल्‍टीपल स्‍क्‍लेरोसिस के अटैक आ सकते हैं। इसके अलावा अगर बहुत ज्‍यादा तनाव है तो भी ये बीमारी बार बार सामने आ सकती है। देखा गया है कि बहुत ज्‍यादा डेयरी प्रोडक्‍ट जैसे दूध, दही, चीज आदि इस्‍तेमाल करने पर भी ये बीमारी हो सकती है। वहीं मांसाहारी लोग जो रेड मीट खाते हैं उनमें भी ये बीमारी ट्रिगर हो सकती है। कई बार रसोई में साफ-सफाई के लिए इस्‍तेमाल किए जाने वाले कैमिकल, इन्‍सेक्टिसाइड, पेस्‍टीसाइड्स आदि के संपर्क में रहने से भी ये बीमारी हो सकती है।

मल्‍टीपल स्‍क्‍लेरोसिस के मरीज इस प्रकार कर सकते हैं उपाय

  • मल्‍टीपल स्‍क्‍लेरोसिस होने पर योग करें, तनाव को कम करें। अमेरिका ने स्‍टडी की है जिसमें पाया है कि योग से एमएस के मरीजों को फायदा पहुंचा है।
  • एमएस के मरीजों को ठंडे वातावरण में रहना चाहिए।
  • डायट अच्‍छी होनी चाहिए. रेड मीट, दूध के प्रोडक्‍ट कम लें. प्राकृतिक भोजन लें। आर्टिफिशियल फ्लेवर आदि का खाना न खाएं. फाइबर युक्‍त, विटामिन और प्रोटीन से युक्‍त खाना लें।
  • कैमिकल्‍स से  घर में सफाई करने के बजाए प्राकृतिक चीजों से सफाई करें।
  • बहुत कठिन फिजिकल एक्‍टीविटीज न करें।
  • अगर बीमारी की जानकारी मिल रही है तो शुरुआत में ही डॉक्‍टर के पास पहुंचें. इतना ही नहीं अगर इलाज चल रहा है तो फायदा पड़ने पर इलाज को  पूरा लें।

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