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Telecom Bill 2023 लोकसभा में हुआ पेश, सुरक्षा में सेंध पर हंगामा करने वाले 34 सांसद पूरे सत्र के लिए निलंबित

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संसद के शीतकालीन सत्र के 11 वें दिन आज केंद्र सरकार की तरफ से नया टेलीकॉम बिल पेश किया गया। केंद्रीय टेलीकॉम मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में टेलीकॉम बिल 2023 पेश किया। इस बिल के जरिए केंद्र सरकार ने नया टेलीकॉम कानून बनाने की ओर एक बड़ा कदम बढ़ा दिया है। बता दें कि यह नया टेलीकॉम बिल 1885 के टेलीग्राफ एक्ट की जगह लेगा। टेलीकॉम बिल को कैबिनेट की तरफ से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है जिसके बाद आज सदन में इसे पेश किया गया। केंद्र सरकार नए टेलीकॉम बिल को नए नियमों के साथ ला रही है। बिल में OTT की परिभाषा को भी हटाया गया है। 

हंगामा करने वाले 34 सांसदों पर एक्शन-

वहीं सुरक्षा चूक के मसले पर लोकसभा में लगातार चौथे दिन जमकर हंगामा हुआ। जिसके चलते हंगामा करने वाले 34 सांसदों पर एक्शन लेते हुए 34 सांसदों को स्पीकर ओम बिड़ला ने सस्पेंड कर दिया। इसमें नेता विपक्ष अधीर रंजन चौधरी का नाम भी शामिल है। इससे पहले 14 दिसंबर को लोकसभा से 13 सांसदों को निलंबित किया गया था। अब तक कुल 47 लोकसभा सांसदों को पूरे शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित किया गया है। इसके साथ ही राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन को भी  14 दिसंबर को सस्पेंड किया जा सस्पेंड किया जा चुका है। 

आज सदन में क्या हुआ-

आज सदन में लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला सदन की कार्यवाही शुरू होते ही 15 मिनट की स्पीच दी। उन्होंने कहा कि घटना पर राजनीति होना दुर्भाग्यपूर्ण है। फिर इसके बाद हंगामा बढ़ा तो सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित की गई। बाद में यह 2 बजे और फिर उसके बाद कल यानी मंगलवार तक के लिए लोकसभा को स्थगित कर दिया गया। 

राज्यसभा भी 4 बजे तक स्थगित-

वहीं, राज्यसभा में भी  लोकसभा में घुसपैठ के मुद्दे पर हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही पहले 11.30 बजे तक स्थगित हुई इसके बाद जब कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और गृह मंत्री  अमित शाह से बयान देने की मांग की जिसके बाद संसद को 4 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

सदन में नारेबाजी, तख्तियां लाना ठीक नहीं-

स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि संसद की सुरक्षा चूक मामले में उच्चस्तरीय जांच जारी है। मामले में जांच कमेटी गठित की गई है। पहले भी जब इस तरह की घटनाएं हुईं तो पूर्व स्पीकरों के जरिए ही जांच प्रक्रिया आगे बढ़ी। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस घटना को लेकर राजनीति हो रही है। सदन में लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत ही चर्चा होनी चाहिए। सदन में नारेबाजी करना, तख्तियां लाना, विरोध करते हुए वेल में आना, आसंदी के पास आना ठीक नहीं है। देश के लोग भी इस आचरण को पसंद नहीं करते। 

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