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4 साल में तीसरी बार बिहार में फिर नीतीश सरकार

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(Special Story) बिहार में आज फिर से नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हुआ। इसमें नीतीश कुमार ने आज शाम 5 बजे  9वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सम्राट चौधरी और नेता प्रतिपक्ष रहे विजय सिन्हा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। नीतीश के साथ कुल 8 मंत्रियों ने शपथ ली। बारी-बारी से मंत्रियों ने मंत्री पद की शपथ ली। विजय कुमार चौधरी ने मंत्री पद की शपथ ली इसके बाद जेडीयू नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंत्री पद की शपथ ली। फिर भाजपा नेता डॉ. प्रेम कुमार ने मंत्री पद की शपथ ली। वे गया से आठ बार के विधायक हैं। इसके बाद नालंदा से 7 बार जेडीयू विधायक रहे श्रवण कुमार ने मंत्री पद की शपथ ली। श्रवण को नीतीश का करीबी माना जाता है। हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझाी के बेटे संतोष कुमार सुमन ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद संतोष कुमार सुमन ने मंत्री पद की शपथ ली। निर्दलीय विधायक सुमित सिंह ने मंत्री पद की शपथ ली। उनकी शपथ के साथ ही समारोह समाप्त हो गया।

नीतीश कुमार ने सीएम पद से दिया था इस्तीफा-

इससे पहले आज नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद नीतीश कुमार ने 128 विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंप दिया था। जिसमें भाजपा के 78, जेडीयू के 45, हम पार्टी के चार और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं। आज राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद मीडिया से मुखातिब होने पर नीतीश कुमार ने कहा था कि वो अब इस गठबंधन का साथ और नहीं दे सकते। उन्होंने पार्टी के सभी सदस्यों की राय से ऐसा किया है। नीतीश ने कहा था कि गठबंधन में काम करना बहुत मुश्किल हो गया था इसलिए ये कदम उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि हम नए गठबंधन के साथ सरकार बनाएंगे।आपको बता दें कि नीतीश कुमार ने एनडीए के साथ नौवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। 

ये साथ अब और नहीं-

केंद्र सरकार के कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने के बाद सीएम नीतीश ने जैसे पीएम मोदी की प्रशंसा की और उसके बाद लालू की बेटी रोहिणी आचार्या के ट्वीट के बाद से हुए घटनाक्रम से उत्पन्न हुई दोनों पार्टियों के बीच की खटास ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। तभी से जो दोनों पार्टियों में सुगबुगाहट शुरू हुई थी उसका अंत आज नीतीश कुमार ने इस्तीफा देखर कर दिया। नीतीश ने साफ शब्दों में कह दिया ये साथ अब और नहीं।

बिहार BJP प्रभारी विनोद तावड़े क्या बोले-

भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने कहा कि जेडीयू, भाजपा और एनडीए के अलायंस मिलकर बिहार में नई सरकार बना रहे हैं। सम्राट चौधरी को भाजपा विधायक दल का नेता और विजय सिन्हा को उपनेता बनाया गया है। जानकारी के मुताबिक, जेडीयू-भाजपा से 3-3 विधायक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। शपथ समारोह में और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल हो सकते हैं। नड्डा आज 3 बजे पटना पहुंच रहे हैं।

नीतीश कुमार तीसरी बार BJP के हुए- 

पहली बार- आपको बता दें कि 1996 में नीतीश कुमार ने भाजपा से पहली बार गठबंधन किया था। 3 मार्च 2000 को सीएम बने, लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाने के चलते उनको पद छोड़ना पड़ा और अटलजी की सरकार में केंद्र में रेल मंत्री बने। 1996 से 2013 तक नीतीश बीजेपी के साथ साथ रहे। इसके बाद जब नरेंद्र मोदी को भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया तो वे एनडीए से अलग हो गए। 2015 में महागठबंधन की सरकार में सीएम रहे। 

दूसरी बार- नीतीश  2017 में एनडीए में लौटे और भाजपा की मदद से सरकार बनाई।

तीसरी बार- 2024 में अब वे तीसरी बार भाजपा की मदद से मुख्यमंत्री बनेंगे। 28 साल में तीसरी बार वे भाजपा के साथ हैं।

नीतीश कुमार का CM वाला सफर-

नीतीश कुमार 9वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। आइए आपको बताते हैं कब-कब नीतीश कुमार बिहार के सीएम बने...

  • नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 को बिहार के सीएम बने थे। हालांकि, बहुमत न जुटा पाने की वजह से उन्हें 10 मार्च 2000 को पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
  • बिहार में 2005 में हुए चुनाव में नीतीश बीजेपी के समर्थन से दूसरी बार मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए।  
  • 2010 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर नीतीश कुमार बिहार के सीएम बने।
  • लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ पार्टी के खराब प्रदर्शन की वजह से उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। इस दौरान उन्होंने जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री पद सौंपा। हालांकि, 2015 में जब पार्टी में अंदरुनी कलह शुरू हुई तो नीतीश ने मांझी को हटाकर एक बार फिर खुद सीएम पद ग्रहण किया।
  • 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (जदयू, राजद, कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन) की एनडीए के खिलाफ जीत के बाद नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने। यह कुल पांचवीं बार रहा, जब नीतीश ने सीएम पद की शपथ ली।
  • डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होने का फैसला किया। उन्होंने जुलाई 2017 में ही पद से इस्तीफा दिया और एक बार फिर एनडीए का दामन थाम कर सीएम पद संभाला।
  • 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन ने जीत हासिल की। हालांकि, जदयू की सीटें भाजपा के मुकाबले काफी घट गईं। इसके बावजूद नीतीश कुमार ने सीएम पद की शपथ ली।
  • 2022 में एनडीए से अलग होने के एलान के ठीक बाद नीतीश कुमार ने राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन से जुड़ने का एलान कर दिया। इसी के साथ नीतीश कुमार ने आठवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और आज यानि 28 जनवरी 2024 को उन्होंने आठवीं बार मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया
  • आज नीतीश कुमार 9वीं बार बिहार के सीएम पद की शपथ लेंगे। 

नीतीश का वो बयान जो हो रहा है वायरल-

जब से आरजेडी और जेडीयू के बीच दरार की खबरें सामने आई हैं तभी से सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार का एक बयान खूब वायरल हो रहा है जिसमें नीतीश कुमार कर रहे हैं कि ''अब मर जाना कबूल है, लेकिन बीजेपी के साथ जाना कभी कबूल नहीं है।'' नीतीश कुमार ने ये बयान 30 जनवरी 2023 को पटना के गांधी घाट पर महात्मा गांधी  को श्रद्धांजलि देने के बाद दिया था। आपको बता दें कि इस बयान को अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ है कि नीतीश कुमार ने अपने इस बयान को झुठलाते हुए एक बार फिर से पलटी मारते हुए एनडीए के साथ हो लिए हैं। 

नीतीश का किससे कब हुआ मोहभंग-

1974 के छात्र आंदोलन के जरिये राजनीति में कदम रखने वाले नीतीश कुमार, 1985 में पहली बार विधायक बने।  इसके बाद नीतीश कुमार ने पलटकर नहीं देखा और सियासत में आगे बढ़ते चले गए। लालू प्रसाद यादव 1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बने, लेकिन 1994 में नीतीश कुमार ने उनके बढ़ते दबदबे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नीतीश और लालू एक साथ जनता दल में थे, लेकिन राजनीतिक महत्वकांक्षा में दोनों के रिश्ते एक दूसरे से अलग हो गए। साल 1994 में नीतीश ने जनता दल छोड़कर जार्ज फर्नांडीस के साथ मिलकर समता पार्टी का गठन किया।

 इसके बाद साल 1995 में वामदलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़े, लेकिन नतीजे पक्ष में नहीं आए। नीतीश ने लेफ्ट से गठबंधन तोड़ लिया और 1996 में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा बन गए। इसके बाद नीतीश कुमार बिहार में बीजेपी के साथ 2013 तक साथ मिलकर चुनाव लड़ते रहे और बिहार में सरकार बनाते रहे। आइए आपको दिखाते हैं कब किससे अलग हुए...

 

 

 

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