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भारत की कूटनीति आई काम, कतर से लौटे पूर्व नौसैनिकों ने PM मोदी को दिया धन्यवाद

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भारत की एक बार फिर बड़ी कूटनीतिक जीत हुई है। कतर की जेल में बंद पूर्व भारतीय नौसैनिकों को आखिरकार 18 महीने बाद जेल से रिहा कर दिया गया है। भारत सरकार ने सभी आठ भारतीयों की रिहाई पर खुशी जताई है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि 8 में से 7 भारतीय वापस भारत लौट आए हैं। हम अपने नागरिकों की रिहाई और घर वापसी के लिए कतर के अमीर के फैसले की सराहना करते हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी का किया धन्यवाद-

भारत लौटे पूर्व नौसैनिक अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के बिना उनकी रिहाई संभव नहीं थी। उन्होंने दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरने के बाद 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। सभी पूर्व अधिकारियों ने पीएम मोदी और कतर के अमीर को धन्यवाद दिया।

क्या है मामला?

कतर की अदालत ने भारतीय नौसेना के 8 पूर्व कर्मचारियों को पिछले साल 27 अक्टूबर को मौत की सजा सुनाई थी। इस फैसले से भारत बेहद हैरान था। हालांकि, भारत सरकार ने साफ कर दिया था कि वह इस मामले में सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है। ऐसा माना जाता हे कि कतर के साथ भारत के रिश्ते अच्छे हैं और इसके बावजूद कतर ने 8 भारतीयों को मौत की सजा सुनाई थी।

कौन हैं ये आठ भारतीय?

कतर की अदालत ने जिन 8 लोगों को सजा सुनाई थी वो भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं-

1. कमांडर पूर्णेंदु तिवारी 

2. कमांडर सुगुणाकर पकाला

 3. कमांडर अमित नागपाल

 4. कमांडर संजीव गुप्ता

 5. कैप्टन नवतेज सिंह गिल 

6. कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा

 7. कैप्टन सौरभ वशिष्ठ 

8. नाविक रागेश गोपाकुमार

सभी पूर्व अधिकारियों ने भारतीय नौसेना में 20 वर्षों तक सेवाएं दी है। इन लोगों ने प्रशिक्षकों सहित महत्वपूर्ण पदों पर काम किया था। साल 2019 में, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी को प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित किया गया था, जो प्रवासी भारतीयों को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।

2022 में गिरफ्तार हुए थे नौसैनिक-

आठों पूर्व नौसैनिक दोहा स्थित अल दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी में काम करते थे। इन्हें अगस्त, 2022 में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, आरोप कभी सार्वजनिक नहीं किए गए। सूत्रों का कहना है कि सभी पर पनडुब्बी परियोजना की जासूसी करने का आरोप था। अल दाहरा ग्लोबल कंपनी कतर के सैन्य बलों व अन्य सुरक्षा एजेंसियों को प्रशिक्षण व अन्य सेवाएं मुहैया कराती है। एक साल से अधिक जेल में रहने के बाद पूर्व नौसैनिकों को कतर की निचली अदालत ने अक्टूबर में मौत की सजा सुनाई थी। केंद्र सरकार इससे हैरान थी क्योंकि कतर ने पहले इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। भारत ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी। आपको बता दें कि कतर प्राकृतिक गैस का भारत के लिए बड़ा आपूर्तिकर्ता है। वहां करीब आठ लाख भारतीय काम करते हैं।

 

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