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नेशनल सिक्योरिटी ग्रुप की बड़ी चूक, सिग्नल चैट में लीक हुए वॉर प्लान्स!

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अमेरिका में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। नेशनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स का एक गुप्त ग्रुप चैट, जो सिग्नल ऐप पर संचालित हो रहा था, उसमें गलती से एक पत्रकार को जोड़ दिया गया। इस ग्रुप में वॉर प्लान्स और अन्य संवेदनशील जानकारियों पर चर्चा हो रही थी। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस गलती का पता छह दिनों तक किसी को नहीं चला। जब पत्रकार को इस बारे में एहसास हुआ, तो उन्होंने खुद ही ग्रुप छोड़ दिया।

क्या सिग्नल ऐप असुरक्षित है?

इस घटना के सामने आने के बाद कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सिग्नल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले ऐप भी संवेदनशील जानकारियों को सुरक्षित नहीं रख सकते? हालांकि, सिग्नल का कहना है कि यह दुनिया के सबसे सुरक्षित मैसेजिंग ऐप्स में से एक है। इसकी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन तकनीक इतनी मजबूत है कि न तो कोई तीसरा पक्ष, न सरकार और न ही खुद सिग्नल कंपनी इन चैट्स को एक्सेस कर सकती है।

क्या है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन?

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक उन्नत सुरक्षा तकनीक है, जिसमें संदेश (मैसेज) को एक जटिल कोड में बदल दिया जाता है। इसे सिर्फ वही व्यक्ति डिक्रिप्ट कर सकता है, जिसके लिए वह संदेश भेजा गया है। इस तकनीक का उपयोग कई प्रमुख मैसेजिंग प्लेटफॉर्म करते हैं:

  • WhatsApp

  • Signal

  • iMessage

  • Telegram (सीक्रेट चैट्स के लिए)

यह तकनीक सुनिश्चित करती है कि कोई भी बाहरी व्यक्ति, सरकार, या हैकर आपके मैसेज को इंटरसेप्ट नहीं कर सकता। हालांकि, इस सुरक्षा के बावजूद भी मानवीय गलतियां या लापरवाही भारी पड़ सकती हैं।

भारत में संवेदनशील डेटा की सुरक्षा कैसे की जाती है?

भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ आम मैसेजिंग ऐप्स जैसे WhatsApp या Telegram की बजाय Sandes, GIMS (Government Instant Messaging System) और Secure Intranet Systems जैसे स्वदेशी एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करती हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि इन प्लेटफॉर्म्स को भारतीय सरकार द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जिससे संवेदनशील जानकारी लीक होने का खतरा बहुत कम हो जाता है।

सिर्फ सुरक्षित ऐप्स इस्तेमाल करना ही काफी नहीं

अमेरिका की इस घटना से एक अहम सबक मिलता है—सिर्फ सुरक्षित ऐप्स का उपयोग करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही तरीके से उनका इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है। अगर सावधानी न बरती जाए, तो सबसे उन्नत और सुरक्षित टेक्नोलॉजी भी बेकार साबित हो सकती है।इस घटना के बाद, दुनियाभर की सुरक्षा एजेंसियों और संगठनों को अपने संचार प्रोटोकॉल को और अधिक सुरक्षित और सतर्क बनाने की आवश्यकता है।

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