बड़ी खबरें

एस्ट्राजेनेका ने दुनियाभर से कोरोना वैक्सीन मंगाई वापस, वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर उठे थे सवाल 13 घंटे पहले लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में 93 सीटों पर 64.58 फीसदी मतदान, असम में सबसे ज्यादा 81.71 फीसदी हुई वोटिंग 13 घंटे पहले उत्तराखंड में 10 मई से चारधाम यात्रा गंगोत्री और यमुनोत्री के खुलेंगे कपाट, आज से हरिद्वार-ऋषिकेश काउंटर पर ऑफलाइन पंजीकरण शुरू 13 घंटे पहले मायावती ने भतीजे आकाश आनंद से छीना उत्तराधिकार, नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से भी हटाया 13 घंटे पहले शाहजहांपुर में गरजे CM योगी: कहा- रामभक्तों पर गोली चलाने वाले कहते हैं अयोध्या में राम मंदिर बेकार बना 8 घंटे पहले पीएम मोदी के भाषण के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची कांग्रेस, नड्डा-अमित मालवीय को कर्नाटक पुलिस का नोटिस 7 घंटे पहले उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग मामलें में बोला सुप्रीम कोर्ट-उत्तराखंड सरकार और याचिकाकर्ता केंद्रीय समिति को दें रिपोर्ट दें 7 घंटे पहले सनराइजर्स के खिलाफ लखनऊ ने जीता टॉस, पहले बल्लेबाजी का फैसला 7 घंटे पहले सैम पित्रोदा ने ओवरसीज कांग्रेस अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा, 'नस्ली' टिप्पणियों पर विवाद के बाद उठाया कदम 7 घंटे पहले

आधुनिकता के दौर में क्यों पीछे छूटे इक्के-तांगे ?

कभी शानो शौकत की सवारी कहे जाने वाले इक्के व तांगे आज जैसे गुम हो गये है। कभी इक्के व तांगे की सवारी राजशाही सवारी मानी जाती थी। जैसे-जैसे समय का पहिया घूमा,लोग आधुनिक संसाधनों की ओर बढ़ने लगे। अब गांव-गांव, घर-घर दुपहिया व चार पहिया वाहनों की बाढ़ सी आ गई है। पहले जहां लोग इक्के व तांगें पर शौक से बैठकर यात्रा किया करते थे। वहीं अब लोग इस सवारी पर बैठना अपनी मर्यादा व शान के खिलाफ समझते हैं। इतिहास पन्ने थोड़ा और पलटते है और आपको थोड़ा और पीछे लेकर चलते है आज से कुछ दशक पहले तक भारत के विभिन्न प्रदेशों मे इक्के-तांगों का बोलबाला था। मसलन उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में अगर इक्के खूब चलते थे, तो पश्चिमी क्षेत्र में सवारी के नाम पर तांगे देखे जा सकते थे। लखनऊ में तांगे और इक्के दोनों का प्रचलन था। लेकिन लखनऊ ने दुनिया की चाल से चाल मिलाई और इक्के-तांगे कहीं पीछे छूट गए।  देखिए हमारी खास रिपोर्ट-

अन्य ख़बरें