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देश के सबसे साफ-सुथरे इस शहर में अब भीख देना होगा अपराध! क्या ये अन्य शहरों के लिए बन सकती है प्रेरणा?

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इंदौर, जो स्वच्छता में लगातार देश में नंबर-1 रहा है, अब एक ऐसा कदम उठाने जा रहा है जो सामाजिक सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। 1 जनवरी 2025 से इंदौर में किसी को भी भीख देना अपराध होगा। इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने साफ कहा है कि इस तारीख के बाद अगर कोई व्यक्ति भीख देता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। यह आदेश न केवल स्थानीय प्रशासन की गंभीरता को दिखाता है, बल्कि इस मुद्दे पर एक राष्ट्रीय बहस भी छेड़ सकता है।

भीख मांगने पर पहले से है प्रतिबंध-

इंदौर पहले ही भीख मांगने पर प्रतिबंध का आदेश जारी कर चुका है। प्रशासन का मानना है कि भीख देने की प्रवृत्ति को रोकने से इस सामाजिक समस्या का समाधान हो सकता है। यह कदम न केवल शहर को व्यवस्थित बनाने में मदद करेगा, बल्कि भिखारियों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को भी बल देगा।

भारत में भीख: आंकड़ों की नज़र

1-भिखारियों की कुल संख्या

  • 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में कुल 3.72 लाख भिखारी हैं।
  • इनमें 1.97 लाख पुरुष और 1.74 लाख महिलाएं शामिल हैं।

 

2-आयु वर्ग

  • 19 साल से कम उम्र के लगभग 55,000 बच्चे भिखारी हैं।
  • 60 साल से ज्यादा उम्र के 1.43 लाख बुजुर्ग भीख मांगते हैं।

3-राज्यवार आंकड़े

  • सबसे ज्यादा भिखारी: पश्चिम बंगाल (81,244)।
  • उत्तर प्रदेश (65,835), आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान भी भिखारियों की अधिक संख्या वाले राज्यों में शामिल हैं।
  • दिल्ली जैसे बड़े शहर में 2,187 भिखारी हैं।

4-धार्मिक आधार पर आंकड़े

  • 72% भिखारी हिंदू समुदाय से हैं।
  • 25% भिखारी मुस्लिम समुदाय से आते हैं।

5-शैक्षिक स्थिति

  • 2.92 लाख भिखारी अनपढ़ हैं।
  • 3,000 से ज्यादा भिखारी डिग्रीधारी हैं।
कानून और न्यायालय के विचार-
 
1959 का बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट 20 से ज्यादा राज्यों में लागू है, जो सड़कों पर भीख मांगने को अपराध मानता है। हालांकि, 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भीख मांगने पर रोक लगाना सही नहीं है और इसे एक सामाजिक व आर्थिक समस्या बताया। 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी भीख मांगने को अपराध मानने पर सवाल उठाए थे, यह कहते हुए कि इससे गरीब और कमजोर वर्ग के मौलिक अधिकारों का हनन होता है।

इंदौर की पहल का महत्व-

इंदौर प्रशासन का यह कदम देश के अन्य शहरों के लिए एक प्रेरणा बन सकता है। हालांकि, इस पहल को सफल बनाने के लिए समाज के हर वर्ग का सहयोग आवश्यक है। सिर्फ भीख देने पर रोक लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि भिखारियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास, रोजगार के अवसर और पुनर्वास केंद्रों की स्थापना जैसे कदम उठाने होंगे।

भविष्य की क्या है राह?

इंदौर की पहल सराहनीय है, लेकिन इसे एक स्थायी बदलाव में बदलने के लिए सरकार और समाज को मिलकर काम करना होगा। बच्चों और महिलाओं को शिक्षा और स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। हमें यह समझना होगा कि भीख मांगना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि गरीबी और सामाजिक असमानता का प्रतीक है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक समग्र और संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इंदौर का यह कदम एक बेहतर समाज की ओर बढ़ता हुआ पहला कदम हो सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि देश के अन्य शहर इस मॉडल को अपनाने में कितनी तत्परता दिखाते हैं।

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